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बूंद-बूंद के लिए तरसे लाइन पार कॉलोनीवासी

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बूंद-बूंद के लिए तरसे लाइन पार कॉलोनीवासी
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अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
तमाम दावों के उलट त्योहारी सीजन में शहर के लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए पानी की पानी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बीते सात दिन से फाटक पार की आधा दर्जन कॉलोनियों में लोगों के घरों तक पानी की बूंद तक नहीं पहुंच पाई है। वहीं शहर के अन्य भागों में भी एक दिन छोड़कर एक दिन पानी दिया जा रहा है। वह भी तय मात्रा से बेहद कम। शहरवासियों की परेशानी यहीं पर कम नहीं हो रही है। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलने वाले दो घंटे की सप्लाई में भी बिजली कटों ने ग्रहण लगा दिया है। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए विभाग की अेार से टैंकर से पेयजल सप्लाई की बात कही जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जरूरतमंदों तक टैंकर पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। लोगों अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक दिन में 500-700 रुपये पानी पर खर्च करने पड़ रहे हैं। जरूरतमंद लोगों का हाल यह है कि उन्हें उधार लेकर पानी खरीदना पड़ रहा है।
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-दावा साबी को झील बनाने का, पीने की लिए बूंद तक के लिए संघर्ष
मानसून सीजन में यमुना नदी में अतिरिक्त पानी को ठिकाने लगाने के लिए तीन महीने तक लगातार नहरी पानी आता रहा। अतिरिक्त पानी को धारूहेड़ा स्थित साबी नदी में डालकर झील तक बनाने का दावा किया गया। लेकिन मानसून सीजन खत्म होते ही झील तो दूर शहर के लोग एक-एक पानी की बूंद को तरस गए। नहरी पानी नहीं आने के चलते अब किसी के पास शहर की व्यवस्था के लिए कोई जवाब नही है।
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झेलनी पड़ती है परेशानी
शहर के अधिकतर हिस्से को गांव कालाका स्थित 980 लाख गैलन के पांच वाटर टैंक से पेयजल की सप्लाई की जाती है। इस पानी से शहर की दो लाख आबादी को 16 दिन तक पानी मिल पाता है। सिंचाई विभाग के रोस्टर के अनुसार रेवाड़ी में चालीस दिन में 16 दिन नहरी पानी दिया जाता है। लेकिन इस बार पांच दिन पहले क्लोजिंग के कारण स्थिति बिगड़ गई। बीते तीन साल से कालाका गांव के पास ही सिंचाई विभाग की आठ एकड़ जमीन जन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरण करने की प्रक्रिया चल रही है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत ने भी रेवाड़ी में करीब दो साल पहले अधिकारियेां की मीटिंग के दौरान समस्या को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए थे। लेकिन आज तक मामला अटका हुआ है। उल्लेखनीय है कि आठ एकड़ जमीन पर 300 लाख गैलन क्षमता का वाटर टैंक बनाया जाना है। जिससे शहर के लिए पांच दिन की अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता बढ़ जाएगी।
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निर्धारित मात्रा से कम पानी मिलना भी बड़ी समस्या
पानीपत स्थित खुबडू हेड से 114 किमी. दूरी तय करके नहरी पानी जेएलएन नहर के माध्यम से रेवाड़ी में पहुंचता है। झज्जर स्थित आकेडी पंप तक नहरी पानी 927 क्यूसेक प्रति सेकेंड की बजाय 600 क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर से पहुंचता है। इसका बड़ा कारण पंजाब सरकार की ओर से 32 की बजाय 18 एकड़ फुट पानी मिलना है।
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18 करोड़ खर्च के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था
लिफ्ट इरीगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए 18 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था। सिस्टम को भी सुधारने का काम किया गया। लेकिन जब नहरी पानी पंप हाउस तक पहुंच ही नहीं रहा है तो ऐसे में सुधार का क्या फायदा। जानकारी के अनुसार आकेडी में 12 एवं साल्हावास में 18 फुट पानी को लिफ्ट किया जाता है। इतना ही नहीं शहर तक पहुंचने में 44 बार पानी को लिफ्ट करना पड़ता है। पानी के बहाव को बढ़ाने के लिए सिंचाई विभाग साल्हावास स्थित जेएफ-2 पर 18 करोड़ की लगात से पंप हाउस की क्षमता को बढ़ाया गया है। इतना ही नहीं बिजली सप्लाई फेलियर से बचने के लिए सभी पंप हाउस पर डबल लाइन डालने का काम किया गया। लेकिन इन सबके बावजूद शहरवासियों का कंठ सूखा ही रह गया।
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शहर पूर्णत नहरी पानी पर निर्भर
रेवाड़ी में पब्लिक हेल्थ एवं इजीनियरिंग विभाग की ओर से शहर के 40 हजार घरों तक हर महीने करीब 45 हजार लाख लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। इसमें झज्जर रोड स्थित गांव लिसाना से 80 लाख एवं कालाका से करीब 170 लाख लीटर पानी दिया जाता है। भूजल स्तर बहुत नीचे एवं फ्लोराइडयुक्त होने के कारण शहर के लोगों के पास नहरी पानी के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है। वहीं धीरे-धीरे गांवों में भी नहरी पानी योजनाओं को शुरू किया जा रहा है। लेकिन पानी की उपलब्धता नहीं होने के चलते हालात सुधरने की बजाय बिगड़ रहे हैं।
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झज्जर फीडर में मरम्मत के कार्य ने भी बढ़ाई परेशानी
सिंचाई विभाग के एसई प्रवीण कुमार ने बताया कि 73 दिन लगातार पानी चला है। रेवाड़ी में पानी 16 दिन आता है। झज्जर फीडर स्थित जेएलएन फीडर में मरम्मत कार्य होने के चलते कुछ परेशानी आई है। इसी के चलते सात दिन पहले क्लोजर करना पड़ा। 14 अक्तूबर को पानीपत स्थित खूबड़ हेड से पानी छोड़ दिया जाएगा। 16 को सुबह रेवाड़ी में पानी पहुंच जाएगा।
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राशनिंग कर शहर को पानी दिया जा रहा है। आठ एकड़ में अतिरिक्त वाटर टैंक बनाने के लिए जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। इसके बाद शहर में पानी दिक्कत काफी हद तक कम हो जाएगी। फाटक पार की कॉलोनियों में पानी की समस्या का कारण रेलवे लाइन के नीचे पेयजल पाइप लाइन में फॉल्ट होना है। इसको जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा। यहां पर टैंकरों से भी पानी सप्लाई किया जा रहा है। जल्द ही यहां पर पेयजल सप्लाई सुचारू कर दी जाएगी।
डीएस दहिया, कार्यकारी अभियंता, पीएचईडी
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पब्लिक हेल्थ की ओर से उन्हें या किसी अधिकारी को इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है। जन स्वास्थ्य विभाग जिस समय कहेगा निगम लोगों की सहुलियत के लिए बिजली सप्लाई करने के लिए तैयार है।
-राजकुमार जाजौरिया, एसई बिजली निगम, रेवाड़ी सर्कल
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लोगों का यह कहना
एक सप्ताह से पीने का पानी तो दूर दैनिक क्रियाओं के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है। पानी तक समय पर मिलता नहीं है। दावे बड़े-बड़े किए जाते हैं।
मीना, गृहणी
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पानी सप्लाई नहीं आने के चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक-दो दिन तो मैनेज किया जा सकता है। लेकिन सात दिन से बुरा हाल है। आए दिन 500 रुपये में टैंकर खरीदना पड़ रहा है।
ज्योती, इंद्रा कॉलोनी
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यदि हमारे पास पैसे होते तो टैंकर खरीद सकते थे। जन स्वास्थ्य विभाग कहता है कि टैंकर भेजे जा रहे हैं। हमारे पास आज तक एक भी पानी का टैंकर नहीं आया है। उधार में पैसे लेकर दैनिक कार्य करने पड़ रहे हैं।
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पुष्पा देवी, दुर्गा कॉलोनी
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वादे करने में क्या जाता है। लेकिन हकीकत परे है। सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है। समय पर पेयजल उपलब्ध कराने में विफल है। ऐसे में ज्यादा उम्मीदें करना बेमानी है।
जगदीश कुमार, शक्ति नगर
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