डहीना। गांव जैनाबाद में बारिश का पानी खेतों में भरने से 150 एकड़ क्षेत्र में खड़ी बाजरा और कपास की फसल डूब गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है। किसानों ने प्रशासन से विशेष गिरदावरी करवाकर नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार 3 दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद गांव के सीहा साइड स्थित खेतों में पानी भर गया। खेतों में जलभराव के कारण बाजरा और कपास की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि मानसून की शुरुआत में ही इस तरह की स्थिति बनने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
अगर आने वाले दिनों में दोबारा तेज बारिश होती है तो खेतों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है, जिससे नुकसान और अधिक होने की संभावना है।
किसान राज सिंह, बाबूलाल, अमर सिंह, कृष्ण और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि खेती में पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है। महंगे बीज, खाद, दवाइयों और अन्य कृषि कार्यों पर किसानों को काफी खर्च करना पड़ता है।
ऐसे में बारिश के कारण फसल खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब दोबारा बुवाई करना भी संभव नहीं है, क्योंकि मानसून का समय चल रहा है और आगे भी बारिश की संभावना बनी हुई है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित खेतों का जल्द सर्वे करवाकर विशेष गिरदावरी कराई जाए, ताकि वास्तविक नुकसान का पता लगाया जा सके। इसके बाद सरकार की ओर से नियमों के अनुसार किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
हर साल बारिश के मौसम में होता है जलभराव
उदय सिंह, राज सिंह, रामल, समीर कुमार का कहना है कि जैनाबाद क्षेत्र के खेतों में हर साल बरसात के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। बारिश का पानी खेतों में जमा होने से फसल खराब हो जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों के अनुसार खेतों की लेजर लैंड लेवलिंग करानी चाहिए। इससे जमीन समतल हो जाएगी और बारिश का पानी एक ही स्थान पर जमा नहीं होगा। इससे जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और भविष्य में फसल नुकसान की संभावना कम हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील की है। इस मौके पर महेश, फूल सिंह, लक्ष्मी चंद सहित कई किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि यदि समय रहते जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो हर वर्ष बारिश के मौसम में उन्हें इसी तरह नुकसान झेलना पड़ेगा।