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धनतेरस पर 15 करोड़ का कारोबार

Tue, 10 Nov 2015 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
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धनत्रयोदशी अर्थात धनतेरस पर शहर के बाजारों में लोगों ने करीब 15 करोड़ की खरीददारी की। मार्केट खुलते ही शहर के बाजार गुलजार नजर आए। मंदी की मार झेल रहे व्यापारियों के चेहरों पर चमक दिखी।
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भारतीय परंपराओं के अनुसार धनत्रयोदशी के दिन खरीददारी करने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है। बर्तन और लक्ष्मी-गणेश, चांदी-सोने के सिक्कों की जमकर खरीद हुई और शाम को पूजन।

सोमवार को मोती चौक, बारा हजारी, सर्राफा बाजार, अपना बाजार और नया बाजार, पंजाबी मार्केट में हालात यह थे कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा था। भाड़ावास गेट से लेकर झज्जर चौक तक इतनी भीड़ थी कि करीब दो किमी दूरी को पार करने में कम से कम एक घंटे का समय लग रहा था।
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प्रशासन के तमाम इंतजाम भीड़ के सामने बोने नजर आए। सर्राफा बाजार के प्रधान डीके जैन का कहना है कि बाजार में लंबे समय से मंदी जैसा माहौल था। धनतेरस पर खूब भीड़ पहुंची। ज्वैलरी के साथ बर्तन, इलेक्ट्रानिक्स सामान सहित अन्य बाजारों में ज्यादा भीड़ रही।

सर्राफा बाजार सहित सभी बाजारों में एक अनुमान के मुताबिक करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। वहीं बर्तनों के थोक विक्रेता राजेंद्र कुमार का कहना है कि करीब पांच करोड़ रुपये का बर्तनों का कारोबार हुआ है। शहर में बर्तनों की 80 से ज्यादा दुकानें हैं।

दीपावली के लिए जमकर खरीददारी
धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस के दिन से ही पांच दिन का दीपावली पर्व आरंभ हो जाता है। दीपावली पर्व का पहला दिन धनत्रयोदशी के दिन खरीददारी करना अति शुभ होता है। सोमवार को धनतेरस के बाद मंगलवार को छोटी और बुधवार को बड़ी दीपावली रहेगी। बृहस्पतिवार को गोवर्धन पूजा और शुक्रवार को भइया दूज का त्योहार है।

बर्तन की दुकानों पर लंबी लाइनें
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति वाले चांदी-सोने के सिक्कों की दुकानों के साथ बर्तनों की दुकानों पर कतारें लगी हुई थी। चांदी-सोने के सिक्कों में जहां लोग 10 और 20 ग्राम के सिक्के ज्यादा खरीद रहे थे। वहीं बर्तनों में पीतल के पांच बर्तनों को गृहणियां खरीदने में लगी थीं। पीतल के पांच बर्तनों की कीमत एक हजार से लेकर दो हजार रुपये थी। वहीं कुछ लोग धनतेरस पर चम्मच खरीदकर ही लक्ष्मी को खुश करने में लगे थे।

कारोबारी भी हुए खुश
मंदी की मार झेल रहे शहर के व्यापारियों के लिए धनतेरस खुशियां लेकर आया। जिले के बर्तन और आभूषण विक्रेताओं के साथ इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, कंप्यूटर, लैपटॉप और वाहन विक्रेताओं की बिक्री लगभग 15 करोड़ तक पहुंच गई। व्यापारियों का कहना है कि लंबे अर्से से बाजार मंदी की मार झेल रहे थे। धनतेरस को अच्छी खासी बिक्री हो गई।
पहले बाजार में मंदी छाई हुई थी, लेकिन धनतेरस पर हुई खरीद ने कुछ राहत जरूर दी है। लोग बर्तन खरीद में सबसे ज्यादा पांच बर्तन वाली पीतल की थाली खरीद रहे हैं। - राजेंद्र कुमार, बर्तन व्यापारी

धनतेरस पर बर्तन खरीदने वाले लोगों की संख्या में कुछ कमी आई है। इसका कारण आनलाइन शापिंग है, लेकिन आनलाइन से बर्तनों की बुकिंग में वह माल नहीं मिलता जो बुक कराया जाता है। - दीपक, बर्तन व्यापारी

धनतेरस पर चांदी की धातु खरीदना अति शुभ माना जाता है। यह मान्यता है कि इस दिन चांदी खरीदने से घरों में लक्ष्मी का आगमन होता है। इस बार लोग दस व बीस ग्राम का चांदी का सिक्क ज्यादा खरीद रहे हैं। - राजेश सोनी
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धनतेरस पर बर्तनों की खरीद हमारे पूर्वज भी करते आ रहे हैं। इसलिए हम भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मैंने भी पीतल के पांच बर्तन खरीदे हैं। - मंजू, सेक्टर तीन निवासी गृहिणी

घर वालों के कहने पर बर्तनों की खरीद करने के लिए आया था। धनतेरस पर मैंने पीतल की टोकनी और एक स्टील का डिब्बा खरीदा है। - सचिन कुमार, डुंगरवास खरीददार

धनत्रयोदशी के दिन चांदी और सोना खरीदना अतिशुभ माना जाता है। इसके चलते आज हमने चांदी के सिक्के खरीद हैं। - मंजू शर्मा, सेक्टर तीन खरीदार

भारतीय परंपराओं के अनुसार ही आज के दिन हम कुछ न कुछ खरीददारी जरूर करते हैं। इसी के चलते आज हम ज्वेलरी शॉप पर आए हैं। - दीप्ती, फीदेड़ी निवासी, ग्राहक


होमगार्ड के सहारे व्यवस्था
पांच दिन तक चलने वाले दीपावली पर्व के पहले दिन धनत्रयोदशी पर शहर के बाजारों में उमड़ी भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन के इंतजाम नाकाफी नजर आए। शहर के मोती चौक पर आम दिनों में भी भीड़ रहती है, लेकिन धनतेरस पर भीड़ इतनी थी कि पैदल निकले में भी पसीने छूट रहे थे। भीड़ को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी केवल होमगार्ड के जवानों पर ही थी। आलम यह था कि सकता था, क्योंकि लोग वहां एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में थे। प्रशासन की ओर से कोई सुध लेने वाला नजर नहीं आ रहा था।
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