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विश्व रक्तदान दिवस विशेष:

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37 की उम्र में 78 बार रक्तदान कर चुके हैं रामव्रत
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विश्व रक्तदान दिवस पर विशेष : हर साल छह हजार से ज्यादा लोग करते हैं ‘महादान’, रोजाना होता है 18 यूनिट से ज्यादा रक्तदान
फोटो 23 से 26
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
बेरली कलां के रामव्रत यादव, देखने में भले ही उनका शरीर थोड़ा दुबला दिखाई देता है, लेकिन रक्तदान को लेकर उनका जज्बा भी किसी से कम नहीं है। जीवन के 37 बसंत देख चुके रामव्रत अपनी उम्र से दोगुनी बार (यानी 78 बार) रक्तदान कर चुके हैं। 1998 में पहली बार रक्तदान करने वाले रामव्रत का जज्बा कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। खास तौर पर उन लोगों के लिए जो खुद को कमजोर मानकर रक्तदान करने से डरते हैं। रामव्रत भी बताते हैं कि कई लोगों ने उनसे मिलने के बाद भविष्य में रक्तदान करने की ठानी। ग्रामीण परिवेश में रहने वाले रामव्रत रक्तदान को लेकर न केवल लोगों को जागरूक कर रहे हैं बल्कि स्वयं रक्तदान के लिए तत्पर रहते हैं।
जिले की बात करें तो हर साल इस ‘महायज्ञ’ में हजारों की तादाद में युवा रक्तदान करते हैं, ताकि दूसरों की जिंदगी बचाई जा सके। आंकड़े बयान कर रहे हैं पिछले दो सालों में जिले में रक्तदान करने वालों की संख्या छह हजार से भी ज्यादा पहुंची है। इसमें भी खास बात यह है कि यह आंकड़ा हर साल पिछले आंकड़े को पार कर रहा है। इस साल भी अभी तक 2800 यूनिट से ज्यादा रक्तदान हो चुका है। इन सबके पीछे कुछ ऐसे लोग भी हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं। विश्व रक्तदान दिवस पर अमर उजाला कुछ ऐसे ही रक्तदाताओं से रूबरू करवा रहा है। इनमें से कोई सरकारी नौकरी में लोगों को जागरूक करते हुए खुद रक्तदाता बने तो किसी ने दूसरे की जिंदगी खतरे में देख पहली बार रक्तदान किया और फिर हर छह महीने में रक्तदान करने का संकल्प लिया।
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आपदा दिखी तो पैदा हुआ जज्बा.......23
वैसे तो उद्योगपति रवि गुप्ता की जिले में व्यवसाय और समाजसेवा को लेकर पहचान है ही, लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि वह जीवन में 30 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं। साल 2001 में वे मुंबई में किसी निजी काम से गए थे। इसी समय कच्छ में भूकंप आया हुआ था, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कई घायल मुंबई के अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे। इसी दौरान मन में जज्बा आया कि उनके दिए खून से भी किसी की जान बच सकती है। पहली बार किया वह रक्तदान अब रूटीन प्रक्रिया में शामिल हो चुका है।

लोगों के साथ ही खुद भी हुए जागरूक......24
दिल्ली निवासी रवि हुड्डा रेडक्रॉस सोसाइटी में सहायक सचिव हैं। पिछले चार साल के कॅरियर में वह हर छह महीने में रक्तदान करते हैं। इससे पहले कॉलेज लाइफ में भी एक से दो बार रक्तदान किया है। रवि हुड्डा बताते हैं रेडक्रॉस सोसाइटी में अधिकारी के तौर पर कई बार लोगों को जागरूक करता था। उन्हें ब्लड डोनेट करने के फायदे जैसे हार्ट अटैक व अन्य कई बीमारियों से मुक्ति आदि के बारे में बताता था। वहीं मानवीय पहलू के बारे में जानकारी देता था। ऐसे में लोगों को जागरूक करते-करते खुद भी जागरूक हुआ और टाइम टू टाइम रक्तदान करने लगा।
150 दिनों में 2820 यूनिट रक्तदान
सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में डोनेट करने वाले रक्तदाताओं के आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी महीने से अब तक यानी 150 दिनों में 2820 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ है। इसका मतबल 2800 से ज्यादा लोगों ने रक्तदान किया है। यही नहीं इनमें से 2717 यूनिट लोगों की रक्त की जरूरत भी पूरी हुई। खून के जरूरतमंदों में गर्भवती महिलाओं के अलावा बड़ी संख्या में एक्सीडेंट केस के घायल लोग भी थे, जिनकी जान किसी के दिए खून से बची थी।
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साल दर साल यूं रही रही रक्तदान और खपत की स्थिति
साल रक्तदान प्रयोग
2014: 5754 यूनिट 5434 यूनिट
2015: 6208 यूनिट 5266 यूनिट
2016: 6949 यूनिट 6542 यूनिट
2017: 2820 यूनिट 2717 यूनिट
(मई तक)
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रक्तदान के लिए हर साल लोगों खासकर युवाओं की संख्या बढ़ रही है। इस साल भी अभी तक 2800 यूनिट तक रक्तदान किया जा चुका है। शहर के कई नामी लोग युवाओं को रक्तदान करने के लिए जागरूक भी कर रहे हैं। रक्तदान करने से बीमारियों से तो मुक्ति मिलती ही है, साथ ही दूसरों की भी जिंदगी बचती है। -डॉ. नीतू सिंह, इंचार्ज ब्लड बैंक, सिविल अस्पताल रेवाड़ी।

रामव्रत यादव फोटो नंबर 25
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