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मोबाइल टायलेट: पानी न सफाई, बने शोपीस

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मोबाइल टायलेट: पानी न सफाई, बने शोपीस
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
शहर को खुले मेें शौच मुक्त बनाने का अभियान प्रशासन की निष्क्रियता के कारण फेल हो गया है। शहर की स्लम बस्तियों के अलावा अनेेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। शहर को ओडीएफ बनाने के लिए महिम शुरू की गई थी। इसके तहत अनेक जगह मोबाइल टायलेट रखवाए गए थे लेकिन अव्यवस्था के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कई तो ऐसे जगह रखे गए हैं जहां उनका इस्तेमाल ही नहीं है। स्लम क्षेत्र में लोगों को शौच के लिए रात का इंतजार करना पड़ता है।

खरीदे थे छह मोबाइल टायलेट
नगर परिषद प्रशासन ने करीब एक साल पहले शहर के स्लम एरिया और सार्वजनिक स्थानों के लिए छह मोबाइल टायलेट खरीदे थे। शुरूआत में इनको सार्वजनिक स्थानों के साथ झुग्गियों के समीप खड़ा किया गया ताकि श्रमिक वर्ग इनका उपयोग कर सके। अब ज्यादातर ऐसे स्थानों पर ये टायलेट नहीं हैं जहां इनकी जरूरत है। हालात यह है कि अब ये मोबाइल टॉयलेट अपनी जगह पर है ही नहीं। इस कारण झुग्गियों में रहने वाले लोगों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा जहां ये मोबाइल टॉयलेट खड़े हैं, उनमें सफाई और पानी का उचित इंतजाम नहीं है। इस कारण लोग इनका उपयोग भी लोग नहीं कर रहे हैं। शहर के सेक्टर-4 के समीप राजकीय महिला महाविद्यालय को जाने वाले मार्ग पर खड़े मोबाइल टॉयलेट का इस्तेमाल स्थानीय लोग नहीं कर पा रहे हैं। सफाई के अभाव में यह पूरी तरह से बदहाल है। इनमें पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
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इन स्थानों पर खड़े कराए थे
नगर परिषद ने शुरूआत के समय नारनौल रोड पर गोशाला के पास, ढालियावास रोड, रामसिंहपुरा और जवाहरलाल नेहरू पार्क में समीप टॉयलेट खड़े करवाए थे। अब स्थिति यह है कि इनमें से ज्यादातर की लोकेशन बदल दी गई है। इस कारण जरूरतमंदों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सरकार का मकसद अच्छा था लेकिन इस पर बेहतर ढंग से अमल नहीं हुआ। मोबाइल टॉयलेट बेहद जरूरी है क्योंकि महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। नगर परिषद ने कुछ स्थानों पर इनको स्थापित किया लेकिन हालात यह हैं कि ये उपयोग करने लायक तक नहीं रहे। - कमल कुमार
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शुरूआत में तो शहर के प्रमुख स्थानों पर मोबाइल टायलेट नजर आए थे लेकिन अब कहीं पर भी नहीं हैं। सबसे अधिक जरूरत इनकी सार्वजनिक स्थानों के स्लम एरिया में थी। ताकि वहां रहने वाले श्रमिकों को खुले में शौच नहीं करना पड़े। जहां इनको रखा गया है वहां पर सफाई व्यवस्था तक नहीं है। इस वजह से लोग इनका उपयोग नहीं करते हैं। - हंसराज

प्रशासन किसी योजना की शुरूआत तो जोर-शोर से करता है लेकिन उसके मुकाबले व्यवस्था नहीं करता है। शहर में अब ज्यादातर स्थानों पर ये मोबाइल टॉयलेट नजर ही नहीं आते हैं। जहां हैं वहां उनकी हालत इतनी बदतर है कि कई-कई दिनों तक उनमें पानी नहीं मिलता है। - कर्मबीर सिंह
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शहर में मोबाइल टायलेटों की संख्या बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है। लोग अभी भी खुले में लघुशंका जाने को मजबूर हैं। सबसे पहले इनकी सफाई की व्यवस्था के साथ इनमें नियमित रूप से पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अगर सफाई होगी तो लोग इनका उपयोग भी करेंगे। - दिनेश कुमार
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नप ने छह मोबाइल टॉयलेट खरीदे थे। इनकी लोकेशन बदलते रहते हैं। फिलहाल कोनसीवास रोड के साथ कुतुबपुर में इनको लगाया गया है। सफाई और पानी की जिम्मेदारी निजी एजेंसी की है। व्यवस्था खराब है तो निरीक्षण करके इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद।
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