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बदहाल है जिले के आयुर्वेदिक

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खुद इलाज के लिए मोहताज है जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल
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अमर उजाला ब्यूूूरो
रेवाड़ी। जिले के आयुर्वेद अस्पताल इन दिनों खुद इलाज के मोहताज है। ऐसे में प्रदेश सरकार के आयुर्वेद को बढावा देने के दावे खोखले नजर आ रहे है। कहीं चिकित्सकों का अभाव है तो कहीं दवाइयों का टोटा बना हुआ है। विभाग के सूत्रों की माने तो जिले के प्रत्येक आयुर्वेद डिस्पेंसरी में प्रति वर्ष करीब एक लाख रुपये की दवा आनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में करीब 25 हजार रुपये की दवा ही उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा जिले में चार आयुर्वेद चिकित्सक एवं सात फार्मासिस्ट के पद रिक्त है। चिकित्सकों के अभाव में फार्मासिस्ट या फिर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की चिकित्सक का कार्य कर रहे हैं। इससे मरीजों की जान को भी खतरा है।
आयुर्वेद को लेकर लोगों में अभी भी जागरूकता का अभाव बना हुआ है। हालांकि विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए न केवल गांवों में प्रचार-प्रसार किया जाता है बल्कि स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते है। उधर, लोगों का कहना है कि आयुर्वेद विभाग की लापरवाही के कारण जिले की डिस्पेंसरियों में न तो चिकित्सक है और न ही दवाईयों उपलब्ध हो रही है। लोगों को समय पर उपचार भी नहीं मिल पा रहा है।
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ये है डिस्पेंसरियों के हालात
जिले में एक यूनानी एवं 18 आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियां है। इनमें से कुंड, धारण व खोरी की डिस्पेंसरियों में लंबे समय से चिकित्सक का अभाव बना हुआ है। वहीं कुंड, बुडोली, लूला अहिर,भांडौर व नंदरामपुर बास आदि की डिस्पेंसरियों में फार्मासिस्ट के पद रिक्त हैं।

कुंड में चिकित्सक और फार्मासिस्ट नहीं
जिले के कुुंड स्थिति आयुर्वेदिक औषधालय में लंबे समय से न तो चिकित्सक है और न ही फार्मासिस्ट। विभाग की ओर से वहां वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। यहां चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
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विभाग की ओर लोगों के आयुर्वेद के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जहां चिकित्सकों का अभाव है वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। जल्द ही रिक्त पदों को पूरा कर दिया जाएगा। सरकार आयुर्वेद को बढावा देने पर बहुत जोर दे रही है।
डॉक्टर अजीत यादव, जिला आयुर्वेद अधिकारी रेवाड़ी।
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