रेवाड़ी। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही छत के नीचे सभी तरह की सुविधाएं देने के लिए बनाए ग्राम सचिवालय बिना उपयोग के सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। इनमें ना तो कोई कर्मचारी बैठता है, ना ही इनमें कोई काम होता है। ऐसे में करोड़ों खर्च करने के बाद भी वहां रखा समान धूल फांक रहा है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को छोटे कार्यों के लिए शहर में जाने से मुक्ति दिलाने के लिए गांवों में ही ग्राम सचिवालय बनाने की योजना बनाई थी। इनमें दो-तीन ग्राम पंचायतों का एक कलस्टर बनाया गया। जिले में 358 ग्राम पंचायतों पर 108 ग्राम सचिवालय बनाने स्वीकृत हुए थे। इसमें से 83 ग्राम सचिवालय बनकर तैैयार हैं।
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बिना काम के ग्राम सचिवालय
प्रदेश सरकार ने ग्राम सचिवालय खोल तो दिए, लेकिन व्यवस्थित ढांचा न होने के कारण ग्राम सचिवालय खेलने के साथ ही बंद होते चले गए। हालांकि इसके लिए इनमें कंप्यूटर और फर्नीचर सहित अन्य सामना भी रखवा दिया गया। नेट कनेक्शन भी करवा दिया गया। इसके बावजूद अधिकांश स्थानों पर काम नहीं हो पा रहा है।
यह होने थे काम
ग्राम सचिवालयों में एक मीटिंग हॉल, पटवार कक्ष, ग्राम सचिव कक्ष और अन्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। ई-सेवा के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण पत्र, बिजली बिल, वोटिंग कार्ड आदि की सेवाएं मिलनी है। सरकार के निर्देशानुसार ग्राम सचिवालय में सोमवार और मंगलवार को पटवारी, बुधवार को ग्राम सचिव, पूरे सप्ताह बीएलसी और महीने के आखिरी बुधवार को डिपो होल्डर को बैठना था।
श्रमिकों के रहने के काम आ रहे ग्राम सचिवालय
जिले के गांवों में बनाए अधिकांश ग्राम सचिवालयों में बाहर से पंचायतों में किया जा रहे कार्यों के लिए लाए श्रमिकों के ठहरने के काम में इस्तेमाल किया जा रहा है। कभी कभार सरपंचों द्वारा ग्राम सभा और पंचायतों के आयोजन के लिए भी इस्तेेमाल किए जाते है।
ग्राम सचिवालय लुहाना, सुलखा, बधराना और दड़ौली में बनाया
करीब चार साल पूर्व बनाया गया यह ग्राम सचिवालय काफी समय से बंद है। हालांकि ग्राम पंचायत स्तर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अधिकारियों की बैठने की सुविधा नहीं है। यह ग्राम सचिवालय करीब तीन वर्ष पूूर्व बनाया गया था। सामान भी पहुंचा दिया गया था, लेकिन न तो यहां डोमीसाइल बनाए जाते और न ही कोई अधिकारी यहां आते। खाली होने के कारण श्रमिकों के लिए काम में लाया जा रहा है। बधराना गांव में बनाया गया ग्राम सचिवालय भी बदहाल है। यहां भी कमरों में रखा सामान धूल फांक रहा है। कमरों में बेसहारा पशु विचरण करते नजर आते है। दड़ौली गांव में करीब चार साल पूर्व बनाया गया ग्राम सचिवालय भी सफेद हाथी साबित हो रहा है। सामान रखवाए काफी समय बीत गया है, लेकिन यहां कोई भी सरकारी कार्य नहीं किया जाता है।
जितने गांवों के ग्राम सचिवालयों में सुविधाएं शुरू नहीं हो पाई हैं उनके लिए सरकार को लिखा जा चुका है। जल्द ही इन ग्राम सचिवालयों में ग्रामीणों के लिए सभी सुविधा शुरू करा दी जाएंगी। - राजबीर खुंडिया, डीडीपीओ