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नियमों का उल्लंघन करने से सड़क हादसों में होती है बढ़ोतरी

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नियमों का उल्लंघन करने से सड़क हादसों में होती है बढ़ोत्तरी
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में शनिवार को गांव नांगलमूदी स्थित भारतीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पुलिस पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीएसपी यातायात अनिल कुमार मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल प्रधानाचार्य कमल सिंह यादव ने की। अमर उजाला की तरफ से चलाए जा रहे यातायात जागरूकता कार्यक्रम के बारे में जानकारी देने के साथ ही डीएसपी अनिल कुमार ने बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत किया। कार्यक्रम में बच्चों के सवालों के जवाब देकर डीएसपी ने यातायात के नियमों के साथ पुलिस कार्रवाई की जानकारी दी।
डीएसपी अनिल कुमार ने कहा कि आज जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है उतनी ही रफ्तार से सभी अपने नैतिक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में हर वर्ष पूरे देश में डेढ़ लाख लोग जान गंवा देते हैं। इस आंकड़े में कमी नहीं आई है। जान गंवाने वाले 18 से 33 साल के युवा होते हैं जो न केवल अपने परिवार वरन देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते। हादसों की बढ़ती संख्या न केवल चिंतनीय है अपितु इसका असर भी हम पर ही पड़ता है। जान गंवाने वाले व्यक्ति के पीछे कई बार तो पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है। उनके इलाज में लाखों रुपये खर्च कर देते हैं लेकिन फिर भी कई स्थायी तौर पर अपंग हो जाते हैं। यह परिवार और रिश्तेदारों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में हादसों की वजह से यातायात के नियमों की पालना नहीं करना होता है। ऐसा नहीं है कि हम नियमों के बारे में जानते नहीं हैं। काफी लोग ऐसे हैं जो कि नियमों की जानकारी के बावजूद भी उसका उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि 18 साल के बाद ही अपना वैध लाइसेंस लेकर वाहन चलाएं और तमाम कागजात अपने साथ रखें। उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन की यातायात जागरूकता पहल का भी स्वागत किया।
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नाबालिग के साथ अभिभावकों का भी होता है चालान
कार्यक्रम में पहुंचे डहीना चौकी प्रभारी अरविंद कुमार ने कहा कि देश में प्रतिदिन करीब 400 लोग सड़क हादसे में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह काफी चिंता का विषय है। इसके लिए हम सभी को जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर विद्यार्थी अपने घरेलू काम करते समय दोपहिया वाहन का प्रयोग करते हैं। यह उचित नही है। इसके लिए विद्यार्थी की आयु 18 वर्ष, ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, इंश्योरेंस, बीमा व हेलमेट पहनाना चाहिए। अगर कोई नाबालिग वाहन चलाता पकड़ा जाता है तो नाबालिग के साथ उसके अभिभावक का चालान करने के साथ मामला भी दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय हम यातायात के नियमों की पालना हम स्वयं ही नही कल्कि दूसरों भी सुरक्षा रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने माता-पिता से वाहन से चलाते यातायात नियमों के पालना करने की बात कहे। विद्यालय के संचालक प्रधानाचार्य डॉ. कमल सिंह यादव ने कहा कि कई बार सड़क हादसे ऐसे जख्म दे जाते हैं जिसे परिवार के अलावा रिश्तेेदार भी जिंदगी भर नही भूल पाते हैं। हमें युवावस्था में ही यातायात के नियमों का पालना करके दूसरों के लिए प्रेरण स्रोत बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बचाव में ही बचाव है। पुलिस पाठशाला में बताए यातायात के नियमों को ध्यान रखकर सभी को अपने वाहन चलाने चाहिए।
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सवाल: ग्रीन लाइट का क्या महत्व है। कक्षा दसवीं के छात्र दीपक कुमार
उत्तर: यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख चौराहों पर इन लाइटों को लगाया जाता है। रेड लाइट का अर्थ है कि हमें अपने वाहन को रोकना होगा। ग्रीन लाइट का मतलब है कि हम उक्त चौराहे का पार कर सकते हैं। यलो लाइट का मतलब है कि आप तैयार रहें।

सवाल: सड़कों पर यलो बोर्ड क्यों लगाया जाता है। कक्षा दसवी के छात्र विवेक यादव
उत्तर: बोर्ड के माध्यम से सड़कों की पहचान होती है। जिन सड़कों पर यलो बोर्ड पर सफेद संकेत होते हैं वह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग होते हैं। यलो बोर्ड पर ग्रीन अक्षरों में दिए संकेतक स्टेट हाईवे की पहचान कराते हैं। जिला सड़क के लिए सफेद शिलापट्ट होते हैं वे एमडीआर की श्रेणी में आती हैं।

सवाल: चालान का काटने का उद्देश्य क्या है। दसवीं कक्षा के छात्र चमन धनखड़
उत्तर: किसी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कुछ कानून बनाए जाते हैं। कानून की पालना नही करने वालों का जुर्माना किया जाता है। इसी प्रकार यातायात के नियमों का पालन करने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। उन नियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति का चालान किया जाता है।

सवाल: क्राइम और भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है। दसवीं कक्षा की छात्रा विशाखा ने पूछा कि
उत्तर: यह हमारे देश के मोरल को दर्शाता है। पहले इतना भ्रष्टाचार नहीं था लेकिन आज हम भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भ्रष्टाचार करते हैं। यह निश्चित रूप से हमारी व्यवस्था की कमी है। देश की जनसंख्या के हिसाब से रोजगार नही होने के कारण भी क्राइम बढ़ रहा है।

सवाल: चालान कौन कर सकता है। बाहरवी कक्षा की छात्रा महिमा
उत्तर: सरकार की तरफ से अभी तक हवलदार स्तर के कर्मचारी को चालान का अधिकार दिया हुआ है। यह व्यवस्था अब विकेंद्रीकृत की जा रही है ताकि नियमों की अवहेलना करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। सामान्यत: कई बार निरीक्षक स्तर के अधिकारी ही अपनी देखरेख में चालान काटते हैं।

सवाल: डुप्लीकेट लाइसेंस कब तक इस्तेमाल कर सकते हैं। कक्षा बाहरवीं की छात्रा दीपिका यादव ने पूछा कि
उत्तर: यदि हमारा मूल लाइसेंस खो जाता है तो उस स्थिति में हम डुप्लीकेट लाइसेंस हासिल कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित अथॉरिटी में जाकर हम निर्धारित प्रोफार्मा को भरकर डुप्लीकेट लाइसेंस निकलवा सकते हैं। यह पूरी तरह से मान्य होता है।

सवाल: बार-बार चालान होने बाद भी यातायात के नियमों की अवहेलना क्यों हो रही है। कक्षा ग्याहरवीं की छात्रा सरिता यादव
उत्तर: पहली बार बिना लाइसेंस के पांच सौ रुपये का जुर्माना होता है। दूसरी बार में तीन हजार का जुर्माना किया जाता है। तीसरी बार चालक का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है। अगर वह फिर भी वाहन चलाता पाया जाता है तो सजा का प्रावधान भी है।

सवाल: क्या रोडवेज की ओवरलोड बसों का भी चालान हो सकता है। ग्याहरवी कक्षा की छात्रा तन्नू ने सवाल किया कि
उत्तर: चालान सभी वाहनों का किया जाता है। कई बार बस चालक बच जाते हैं। हर बार बस चालक चालान से बच नही पा सकता। रोडवेज की बसों का भी चालान किया जा सकता है।
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सवाल: क्या सरकारी अधिकारियों के भी वाहनों का चालान हो सकता है। कक्षा दसवी की छात्रा मोनिका ने पूछा कि
उत्तर: निश्चित रूप से नियमों की अवहेलना करने वाले चाहे कोई भी उनका चालान किया जाता है। कई मामलों में अधिकारियों के भी चालान हुए हैं ऐसा नहीं है कि केवल आम लोगों के ही चालान किए जाते हैं।
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