खोल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से गांव लिसान में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को ग्वार, कपास तथा अन्य फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए आवश्यक जानकारी दी गई। खरपतवारों की रोकथाम के लिए खरपतवारनाशी दवाओं की बजाए दो बार निराई-गुड़ाई करें।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से सेवानिवृत्त कीट विज्ञान विभाग अध्यक्ष डॉ.आरके सैनी ने कहा कि फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले कई कारण हैं। जिनमें प्रमुख रूप से मौसम के अलावा जमीन में पोषक तत्वों का स्तर, उन्नत किस्में, बिजाई का समय, खरपतवारों, कीटों , बीमारियों का प्रकोप तथा उचित फसल प्रबंधन शामिल हैं। उन्होंने ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए एचजी-365, एचजी-563 तथा एचजी-2-20 किस्मों की सिफारिश की। किसानों को सलाह दी कि बिजाई से पहले खेत में 35 किलो डीएपी अवश्य डालें। उखेड़ा रोग की रोकथाम की दर से बीज को 3 ग्राम कार्बन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करें। खरपतवारों की रोकथाम के लिए खरपतवारनाशी दवाओं की बजाए दो बार निराई-गुड़ाई करे। कृषि विकास अधिकारी डॉ. संजय यादव ने कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों की पूर्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सितंबर मास में कपास में उखेड़ा रोग का कारण कोई बीमारी नहीं, बल्कि पोषक तत्वों की कमी का होना है। शिविर में नम्बरदार जयप्रकाश, बाबूलाल, करण सिंह, दयाराम, राजबीर, ब्रह्मप्रकाश,कृष्ण, अजीत, ईश्वर सिंह, सुनील, शंकर, आनंद, बस्तीराम, शेरसिंह मौजूद थे।