प्रशासन ने शुरू किया बर्तन बैंक, कार्यक्रमों के लिए निशुल्क मिलेंगे बर्तन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। पॉलीथिन सहित थर्मोकोल एवं प्लास्टिक से बने खाने के पात्रों का उपयोग नहीं हो, इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से सराहनीय पहल की गई है। प्रशासन धार्मिक कार्यक्रम, भंडारा सहित अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए स्टील के बर्तन निशुल्क उपलब्ध कराएगा। उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा की पहल पर जिला रेडक्रॉस सोसायटी ने बर्तन बैंक शुरू किया गया है। जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव महेश गुप्ता ने बताया कि जिला में पॉलीथिन सहित प्लास्टिक बर्तनों का उपयोग कम से कम हो इसके लिए यह शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि सोसायटी में स्टील के एक हजार भोजन पात्र, एक हजार गिलास और एक हजार चम्मच की व्यवस्था की गई है ताकि शहर में होने वाले भंडारे व सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक और थर्मोकोल के पात्रों में भोजन, पानी न परोसा जाए। जिला रेडक्रास शाखा से स्टील के बर्तन लेकर इनका प्रयोग किया जा सकता है और इन बर्तनों की सफाई करवाकर वापस शाखा में जमा कराना होगा ताकि अन्य कार्यक्रमों में इनका प्रयोग किया जा सकें। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक और थर्मोकोल के बढ़ते हुए प्रयोग के कारण प्लास्टिक के कचरे में काफी वृद्घि हुई है। इस समस्या पर गंभीरता से विचार करते हुए उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने इसके समाधान के लिए प्रयास शुरू किया है। समाजसेवी अशोक सोमाणी ने उपरोक्त बर्तन जिला रेडक्रास सोसासटी को एक पहल के रूप में दान किए हैं। प्लास्टिक और थर्मोकोल के भोजन पात्र जो यूज ऐंड थ्रो के उद्देश्य से प्रयोग किए जाते हैं उनसे फैलने वाली बीमारियों से भी निजात मिलेगी। उपायुक्त शर्मा ने उम्मीद जताई कि वर्ष 2019 में जिला स्वच्छता में अग्रणी रहेगा और पॉलीथिन मुक्त की राह पर आगे बढ़ते हुए हर क्षेत्र में राज्य का आदर्श जिला बनेगा। उपायुक्त ने सभी आम नागरिकों से आह्वान किया कि वह किसी भी कार्यक्रम में प्लास्टिक के भोजन पात्रो का प्रयोग न करें तथा इन स्टील के बर्तनों का प्रयोग करें।
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शहर से प्रतिदिन निकलता है 10 टन से अधिक प्लास्टिक
अकेले शहर से प्रतिदिन लगभग 45 टन कचरा निकलता है। इस कचरे में ज्यादातर वहीं कचरा होता है जोकि घरों से निकलता है और बाकी शहर की सड़कों पर जमा गंदगी। यदि हम प्लास्टिक कचरे, थर्मोकोल सहित अन्य मानव शरीर के हानिकारक तत्वों की बात करें तो इसकी मात्रा लगातार बढ़ रही है। अनुमानित तौर पर शहर से प्रतिदिन लगभग दस टन से भी अधिक प्लास्टिक कचरा होता है जिसमें मुख्यत: पॉलीथिन होती है। फिलहाल कचरे को रिसाइकिल नहीं किया जा रहा है, जिसकी वजह से डंपिंग यार्ड में भी इस प्लास्टिक कचरे की मात्रा बढ़ती जा रही है। इसमें पॉलीथिन के अलावा थर्मोकोल और प्लास्टिक का कचरा है।
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शहर से प्लास्टिक कचरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिस पर नियंत्रण पाने के लिए हमने कुछ पहल की है। मैं लोगों से भी आह्वान करता हूं कि इसमें सहयोग करें। कम से कम इसकी शुरुआत करेंगे तो सभी को प्रेरणा मिलेगी। इसलिए रेडक्रॉस सोसायटी में बर्तन बैंक शुरू किया गया है। लोग धार्मिक व अन्य कार्यों के लिए इन बर्तनों का उपयोग करें ताकि प्लास्टिक को समाप्त किया जा सके।
- अशोक कुमार शर्मा, उपायुक्त।