नियम 134ए : बच्चों को ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं देने चार स्कूलों पर मामला दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। नियम 134ए के तहत दाखिला मिले बच्चों को स्कूल बस की सुविधा नहीं देने पर आखिरकार जिला प्रशासन ने स्कूलों के खिलाफ सख्त रवैया अपना लिया है। उपायुक्त के निर्देशों के बाद भी इस नियम में दाखिला पाए बच्चों को स्कूल बस सुविधा नहीं देने पर चार स्कूलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। स्कूलों पर मामला दर्ज होने के बाद संचालकों में हड़कंप मच गया है। थाना धारूहेड़ा पुलिस ने उपायुक्त द्वारा भेजे पत्र के आधार पर आईपीसी की धारा-188 के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें आरोप सिद्ध होने पर एक माह की सजा अथवा दो सौ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यह जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।
नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है जिसकी फीस सरकार द्वारा स्कूलों को अदा की जाती है। इस नियमावली के तहत जिला में लगभग 2700 बच्चों को प्रवेश दिया गया है जिसमें सर्वाधिक बच्चे करीब 1400 रेवाड़ी खंड के हैं। रेवाड़ी एवं बावल खंड में स्थित कुछ स्कूल संचालकों द्वारा उन बच्चों को बस सुविधा नहीं दी जा रही है जिनका प्रवेश नियम 134 ए के तहत प्रवेश दिया गया है। अभिभावकों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी एवं उपायुक्त को भी इस बारे में न केवल कई बार शिकायत की अपितु कई बार बच्चों के साथ अभिभावकों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना भी दिया। इसके बाद 28 मई को उपायुक्त ने धारा-144 के तहत बतौर जिलाधीश आदेश जारी किए थे कि प्रशासन द्वारा तय नियमों के तहत इन बच्चों को स्कूलों द्वारा बस की सुविधा प्रदान की जाए। बावजूद इसके कुछ नामी-गिरामी स्कूलों द्वारा इन नियमों की पालना नहीं की गई जिस पर अभिभावक उपायुक्त से मिले। अभिभावकों की शिकायत के बाद उपायुक्त ने इस मामले में पुलिस को पत्र भेजकर इनके खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इसके पश्चात धारूहेड़ा, सदर थाना पुलिस ने दिल्ली रोड स्थित चार स्कूलों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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थाना में पहुंचा दिया था बच्चों को
बावल के एक नामी स्कूल द्वारा प्रशासन के आदेश बावजूद भी बच्चों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं दी गई। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को स्कूल बस में नहीं बैठाया जिसके कारण बच्चों को देर शाम तक स्कूल में ही ठहरना पड़ा। स्कूल प्रबंधन द्वारा इन बच्चों को देर शाम को अभिभावकों के नहीं आने पर बच्चों को कसौला थाने पहुंचा दिया गया था।