संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले के 110 सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी आज भी कौशल विकास से दूर हैं। शिक्षा विभाग की सुस्ती के कारण सालों बाद भी वोकेशनल कोर्स संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या नहीं बढ़ पाई। इसके चलते वोकेशनल कोर्स करने के इच्छुक सैकड़ों छात्र हर साल इससे वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा बनाई गई युवाओं के कौशल विकास को लेकर योजना का लाभ सभी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा।
साल 2012-13 में जिले के 40 सरकारी विद्यालयों में एनएसक्यूएफ (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क) के तहत वोकेशनल कोर्स आरंभ हुए थे, जिनमें नौ स्किल में विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जा रही है। इनसे बच्चों को काफी लाभ भी मिल रहा है। इसे सीखकर बच्चों के अंदर कौशल विकसित होता है, जो विकास के लिए काफी लाभदायक है। जिले में वर्तमान में 150 राजकीय माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चल रहे हैं। इनमें से मात्र 40 विद्यालयों में ही इस वोकेशनल कोर्स कराया जाता है, जबकि 110 विद्यालय ऐसे हैं जो इस कोर्स से वंचित हैं। इन सभी विद्यालयों में वोकेशनल कोर्स तो क्या विद्यार्थी इस कोर्स के बारे में जानते ही नहीं हैं।
नियमों में ढील, फिर भी नहीं बढ़ी स्कूलों की संख्या
विभाग की तरफ से एनएसक्यूएफ के तहत संचालित कोर्सों के नियमों में ढील भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद नए स्कूलों में वोकेशनल कोर्स आरंभ नहीं हो पाए। नए नियमों के अनुसार 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं तक की कक्षाओं में दो-दो साल विद्यार्थी वोकेशनल कोर्स कर सकते हैं। जबकि पुराने नियमों में विद्यार्थियों को नौवीं से 12वीं तक चार साल तक एक ही स्किल में बंधे रहना पड़ता था। पहले विद्यार्थियों के पास कोर्स बदलाव करने का आप्शन नहीं था, लेकिन अब विद्यार्थी नौवीं दसवीं में कोई स्किल पूर्ण करने के पश्चात 11वीं व 12वीं में दूसरी स्किल ले सकते हैं या छोड़ भी सकते हैं।
वर्तमान में इन स्किल में हो रही पढ़ाई
40 सरकारी विद्यालयों में नौ स्किल की पढ़ाई कराई जा रही है, जिसमें आटोमोबाइल, कृषि, हेल्थकेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, बैंकिंग, आइटी, रिटेल, फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स व प्राइवेट सिक्योरिटी स्किल शामिल हैं। इनमें करीब सात हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
स्कूलों में तैयार की गई विशेष लैब
राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क कार्यक्रम के स्कूलों में विशेष लैब तैयार की गई है। इनमें विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद विद्यार्थी खुद का रोजगार शुरू करके आत्मनिर्भर बन सकें।
इस स्कूलों में हो रहा वोकेशनल कोर्स
जिले के कुल 40 विद्यालयों में यह वोकेशनल कोर्स चल रहा है। जिनमें जीएसएस स्कूल खोरी, मॉडल संस्कृति स्कूल पीथड़ावास, जीएसएस स्कूल काकोड़िया, जीएसएस स्कूल बूढ़पुर, मॉडल संस्कृति स्कूल बोढि़या कमालपुर, जीएसएस स्कूल रेवाड़ी, जीएसएस स्कूल भाड़ावास, जीजीएसएस स्कूल बावल, जीएसएस स्कूल संगवाड़ी, मॉडल संस्कृति स्कूल गुड़ियानी, जीएसएस स्कूल साहनवास, जीजीएसएस स्कूल रेवाड़ी, जीएसएस स्कूल धारूहेड़ा व अन्य 27 स्कूल शामिल हैं।
इनके अलावा अन्य विद्यालयों में भी वोकेशनल कोर्स आरंभ कराने के लिए जो भी उचित प्रक्रिया होगी वह की जाएगी। बच्चों के कौशल विकास को लेकर सरकार व विभाग की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं।
- सुभाष चंद सांभरिया, जिला परियोजना संयोजक, रेवाड़ी।