जिला योजना कमेटी के चुनाव रद्द, जिला प्रमुख ने खोला उपायुक्त के खिलाफ मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिला योजना कमेटी के सदस्यों के चयन के लिए 23 अप्रैल को कराए गए चुनाव रद्द करने के बाद जिला प्रमुख मंजूबाला ने उपायुक्त पंकज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को चुनाव रद्द किए जाने की कार्रवाई के दस्तावेज नहीं देने पर जिला प्रमुख शाम को खुद उपायुक्त के पास पहुंची तथा कार्रवाई का विवरण मांगा। इसके बाद उपायुक्त ने उन्हें जल्द ही कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने के आश्वासन दिया। उपायुक्त से मुलाकात के बाद जिला प्रमुख ने उनके व्यवहार पर भी सवाल उठाकर कहा कि चुनाव रद्द करने की कार्रवाई दबाव की वजह से की जा रही है।
23 अप्रैल को कराए गए चुनाव
जिला प्रमुख ने बताया कि जिला योजना कमेटी के लिए जिला परिषद के 13 सदस्यों का चुनाव किया जाता है। 23 अप्रैल को जब इसके चुनाव के लिए बैठक आयोजित की गई थी जिसमें 18 में से 17 पार्षद मौजूद थे तथा उसमें 9 सदस्यों का चुनाव कर लिया गया था। इसी बीच सात पार्षदों ने इस कार्रवाई को सही नहीं बताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया था इन चुनाव को रद्द करने की मांग की थी। इसी बीच उपायुक्त की तरफ से जिन नौ सदस्यों का चुनाव इस कमेटी के लिए किया गया था उनका चुनाव भी रद्द कर दिया। उन्होंने बताया कि जब इसकी जानकारी उन्हें मिली तो उन्होंने उपायुक्त से चुनाव रद्द करने की कार्रवाई का विवरण देने का अनुरोध किया था। इससे पहले एडीसी दफ्तर में भी इस आशय की मांग को लेकर मिल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने अपने एक कर्मचारी को इसकी प्रोसीडिंग लेने के लिए भेजा लेकिन उसको जब यह कार्रवाई विवरण नहीं मिला तो शाम करीब साढ़े 4 बजे जिला प्रमुख मंजूबाला सचिवालय पहुंची तथा सीधे ही एडीसी के कमरे में चली गई। उस समय उपायुक्त अधिकारियों की बैठक ले रहे जिसके बाद वे उपायुक्त से मिलने गई। इस दौरान उपायुक्त के गनमैन ने उन्होंने बैठक का हवाला भी दिया लेकिन वे सीधे ही उपायुक्त से मिलने चली गई। उपायुक्त ने उन्हें जल्द ही कार्रवाई का विवरण देने का आश्वासन दिया। हालांकि इसके बाद जिला प्रमुख ने कहा कि उपायुक्त का व्यवहार जनप्रतिनिधि के साथ नहीं था। उन्होंने जब बात की तो इस मामले में बताया कि सभी पार्षदों को पत्र से सूचना नहीं मिली थी जिसके कारण यह चुनाव रद्द किया गया है। जिला प्रमुख ने प्रशासन पर दबाव में चुनाव रद्द करने का आरोप लगाते हुए कि जब सूचना नहीं थी तो बैठक में 17 पार्षद कैसे पहुंच गए।