कोविड-19 के चलते करीब 10 माह से घरों में कैद रहे कक्षा छठी से लेकर आठवीं के विद्यार्थी आज स्कूल पहुंचेंगे। इसको लेकर विद्यार्थियों से लेकर अभिभावकों में भी उत्साह है। स्कूलों में विद्यार्थियों के आगमन के लिए स्वागत से लेकर अनेक व्यवस्थाएं की गई हैं। वैश्विक बीमारी कोविड के चलते देश में मार्च माह में लॉकडाउन लगा दिया गया था, सबसे पहले स्कूलों को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन बढ़ता देख स्कूल संचालकों ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ऑनलाइन कक्षाएं भी शुरू कर दी गई। लेकिन भौतिक कक्षाओं के मुकाबले ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर विद्यार्थियों व अभिभावकों में उतना जोश नहीं रहा। स्क्रीन टाइम बढ़ने से लेकर बच्चों को मानसिक रूप से भी परेशानी झेलनी पड़ी। लेकिन अब एक बार फिर से स्कूल खुलने से हालात सुधरने की उम्मीद की जा सकती है।
कड़ी निगरानी में लगेंगी कक्षाएं
कक्षाएं अब एक फरवरी से सुबह 10 से लेकर दोपहर डेढ़ बजे तक सभी सरकारी व निजी स्कूलों में लग सकेंगी। लेकिन कोविड के तहत सभी विद्यार्थियों को स्कूल में आने से पहले अपने स्वास्थ्य की जांच करानी होगी। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही विद्यार्थियों को कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा परिजनों से अनुमति प्रमाण पत्र लाना भी अनिवार्य किया गया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया है स्कूलों में पहले की तरह ही सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क व प्रवेश के समय थर्मल स्कैनिंग जरूरी है। इस दौरान स्कूलों का अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया जाएगा। यदि कोई लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई के लिए भी आदेश दिए गए हैं। स्कूलों में पका हुए खाने के स्थान पर सूखा खाना दिया जाएगा।
करीब एक साल से घरों में बच्चे कैद थे, स्कूल खुलने से बच्चों का मानसिक विकास हो सकेगा। पूरे दिन फोन व लैपटोप पर पढ़ने से आंखें खराब होने का भी डर बना हुआ था। वहीं बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो चुका है। स्कूल खुलने से बच्चे भी खुश हैं।
विकास ढिल्लन, अभिभावक सेक्टर- 4
कोरोना के चलते बच्चों को स्कूल में भेजने से डर लगता था, लेकिन अब हालात सामान्य हो चुके हैं। ऑनलाइन कक्षाएं विकल्प तो हो सकती हैं, लेकिन स्कूल की जगह नहीं ले सकती हैं। बच्चे स्कूल में किताबों के अलाव अन्य क्रियाकलापों के माध्यम से भी सीखते हैं।
मुकेश गोकल, अभिभावक, झज्जर रोड
कोरोनाकाल में बच्चों को पढ़ाई कराना किसी चुनौती से कम नहीं था। ऑनलाइन कक्षाओं का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि बच्चों को अब फोन देने की आदत पड़ गई है। स्कूल खुलने से अब एक बार फिर से बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
राजेश कौशिक, अभिभावक, साउथ सिटी
कोरोना अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, ऐसे में सावधानी रखनी जरूरी है। स्कूल खुलने से बच्चों को लाभ मिलेगा, क्योंकि बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं से अब तंग आ चुके थे। उम्मीद है कि स्कूलों की ओर से बचाव के लिए सभी प्रबंध किए जाएंगे।
- डॉ. मधुसूदन शर्मा, टीपी स्कीम।