बिजली निगम की बिजली बिल में गड़बड़ी और रिकॉर्ड को लेकर लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक केस में औसत आधार पर बिजली बिल भेजे जाने की शिकायत पर निगम अधिकारियों बिल ठीक करने की बजाय रिकॉर्ड में गलत मीटर रीडिंग दर्ज कर औसत आधारित 3068 रुपये के बिल को 1.70 लाख रुपये का बना दिया। उपभोक्ता ने समस्या का समाधान करने की बजाय गलत व अनावश्यक बिल ठीक तैयार करने की बात उठाई तो निगम के सीए शगन कुमार ने सॉफ्टवेयर संबंधी दिक्कत बताकर रीडिंग एंट्री की गलती से पल्ला झाड़ लिया।
शक्ति नगर निवासी उपभोक्ता जसवंत सिंह ने बताया कि पिछले दो साल से उनका बिजली बिल औसत आधार पर आ रहा है जबकि उनका बिजली मीटर बिल्कुल दुरुस्त है और बिजली निगम कर्मी हर महीने मीटर रीडिंग भी नोट करके ले जाते हैं। बावजूद इसके विभाग खपत की गई यूनिट के आधार पर बिजली बिल तैयार नहीं कर पा रहा है। जसवंत सिंह ने बताया कि वे पिछले 6 महीनों से बिल ठीक कराने के लिए निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह में उनका बिजली बिल औसत आधार पर 3068 रुपये का बना था, जब इस बाबत उन्होंने सब स्टेशन सिटी-2 के सीए शगन कुमार से ठीक करने की बात कही, तो उन्होंने खपत यूनिट 19 हजार से अधिक दिखाकर एक लाख 70 हजार रुपये का बिल तैयार कर दिया, जबकि मीटर में नवंबर माह तक की 15,438 यूनिट थी। उन्होंने बताया कि औसत आधार पर आए हर बिजली बिल का उन्होंने भुगतान किया है। वहीं विभाग गलत एंट्री हो जाने और सॉफ्टवेयर प्राब्लम से गड़बड़ी हो जाने की बात कह रहा है। उपभोक्ता इस गलती को ठीक कराने के लिए रोजाना निगम के चक्कर काट रहा है और निगम अधिकारी हैं कि बिल ठीक करने का नाम नहीं ले रहे।
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जुलाई 2014 में लगा था डिजिटल मीटर
अमर उजाला से बातचीत में उपभोक्ता जसवंत सिंह ने बताया कि जुलाई 2014 में उनके घर में पुराना मीटर हटाकर नया डिजिटल मीटर लगाया गया था। तभी से बिजली का बिल औसत आधार पर आ रहा है, जबकि मीटर बिल्कुल सही है और रीडिंग भी बराबर निकाल रहा है। उन्होंने बताया कि बिजली बिल में निगम अधिकारियों ने मीटर फॉल्ट दिखाया हुआ है, जबकि हकीकत में मीटर सही है। पुराना मीटर हटने के समय मीटर रीडिंग 15380 थी। इसके बाद नए मीटर की रीडिंग शुरू हो गई थी, लेकिन विभाग की ओर से हर 800 से 900 औसतन यूनिट के आधार पर बिल भेजा गया। जबकि उनका कहना है कि औसत के बजाय खपत यूनिट के आधार पर अपना बिल भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन विभाग अधिकारी अपनी गलती जानते हुए भी इस समस्या का प्राथमिकता से समाधान नहीं कर रहे हैं।
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उपभोक्ता जागरूक, विभाग सुस्त
अक्सर यह देखा गया है कि बिजली उपभोक्ता अपने बिजली बिल में त्रुटी व कम या ज्यादा बिल आने को लेकर इतनी संजीदगी नहीं दिखाते। एक उपभोक्ता जसवंत सिंह हैं कि पिछले छ महीनों से इस्तेमाल की गई यूनिट के आधार पर बिल भुगतान करने को लेकर बिजली निगम के चक्कर काट रहे हैं। उनकी एक छोटी सी शिकायत है कि जितनी बिजली वे खर्च करें, उतना ही बिल उनके घर भेजा जाए। लेकिन विभाग है कि कई शिकायतों के बाद भी औसत आधारित बिल समस्या को ठीक नहीं कर पा रहा है।
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एसई के आदेश के बाद नहीं हुआ बिल ठीक
उपभोक्ता जसवंत सिंह ने बताया कि औसत बिल समस्या पर एसडीओ जगदीप रोहिल्ला ने कोई संज्ञान नहीं लिया, तो एससी इंद्रजीत सिंह के पास पहुंचे। उन्होंने विभाग की स्वीकारते हुए सिटी-2 के सीए शगन कुमार को तुरंत प्रभाव से बिल ठीक करने के आदेश दिए। एसई के आदेश के बाद सीए हरकत में आए जरूर, लेकिन थोड़ा बहुत जोड़ घटाकर बिल समस्या को फिर अधर में छोड़ दिया।
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औसत आधारित बिल समस्याएं काफी संख्या में हैं। इस तरह के डिस्प्यूट शिकायत के आधार पर सीए को फॉरवर्ड कर दिये जाते हैं। यदि बिल में गलत एंट्री हुई है तो इसकी जांच करवाकर तुरंत सही करवाया जाए।
- जगदीप रोहिल्ला, एसडीओ, सिटी-2 सब स्टेशन