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Karnal में लापरवाही की इंतहा...डीजल से हो रहा कोरोना मृतकों का दाह संस्कार

Tue, 15 Sep 2020 05:39 PM IST
ajay kumar अमर उजाला नेटवर्क, करनाल (हरियाणा)
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लोगों ने लगाए लापरवाही के आरोप। - फोटो : अमर उजाला
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कोविड हॉस्पिटल बने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों और तीमरदारों के साथ किए जा रहे दुर्व्यहार और लापरवाही की जो तस्वीर सामने आई है, अव अमानवीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली है। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां दाह संस्कार की परंपरा का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। 

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परिजनों का आरोप है कि शमशान घाट पर डीजल डालकर कोरोना मृतकों की चिताएं जलाई जा रही हैं। उनकी राख (फूल) के ऊपर से एंबुलेंस निकाली जा रहीं हैं। इसे सीधे तौर पर सनातनी दाह संस्कार परंपरा का अपमान बताकर कई समाजसेवियों ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बलड़ी शमशान घाट पर कोरोना संक्रमण से मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए शनिवार की सुबह यहां तीन शव लाए गए। वहां उनके परिजन भी मौजूद थे, जिन्होंने कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में उपचार और नगर निगम द्वारा कराए जा रहे दाह संस्कार की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। 

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केस-1
इस दौरान रामनगर के कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग के साथ आई उनकी बेटी अनीता ने आप बीती सुनाई। वह अपने पिता को लेकर कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज पहुंची तो स्टाफ ने उनसे स्ट्रेचर लेकर आने को कहा। किसी तरह से लोगों से पूछकर स्ट्रेचर लेकर आई तो कहा बेड खाली नहीं है। बेड न होने के कारण उनके पिता सारे दिन तड़पते रहे, डॉक्टरों ने भी नहीं देखा, कह दिया कहीं और ले जाओ।

काफी देर मिन्नतें कीं तो शाम को भर्ती किया। इतना ही नहीं मरीज और तीमारदार से अभद्रता की। पिता, लगातार फोन करते रहे कि किसी अधिकारी से बात करो, यहां कोई व्यवस्था नहीं है, दवा भी नहीं मिल रही है। अटेंड करने को भी स्टाफ नहीं है। एक दो हैं, वह बहुत गंदा बोलते हैं। मुझे ठीक होना है। वह स्वयं उठकर टॉयलेट गए लेकिन कुछ ही देर बाद न जाने क्या हुआ, स्टाफ ने बताया कि उनके पिता की मौत हो गई है। 

आरोप है कि  पिता की डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मृत्यु हो गई है। मैने, जो अपमान यहां सहा है, उसे देखकर कहना चाहती हूं कि ऐसे अस्पताल में अपने मरीजों को न ले जाएं। इसके बाद आज सुबह जब बलड़ी शमशान पहुंचे तो यहां नगर निगम की कोई व्यवस्था नहीं थी। यहां पहुंचते ही कर्मचारी ने डीजल लाने को कहा। उन्हें नहीं मालूम था कि डीजल का क्या करेंगे, जबकि वह तो दाह संस्कार के लिए सामग्री लेकर पहुंची थी। आरोप है कि कर्मचारियों ने चिता पर कुछ लकड़ी रखीं और डीजल डालकर आग लगा दी।

इब्राहिमपुर के एक व्यक्ति ने बताया कि उसके 65 वर्षीय ससुर को भी कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में कोरोना पॉजिटिव आने के बाद ले जाया गया। वह दो दिन वहां रहे। बड़ी मुश्किल में वेंटीलेटर दिया। वहां देखने वाला कोई नहीं था, रात को ढीली होने के कारण ऑक्सीजन क्लिप निकल जाती थी, उसे लगाने को सिस्टर से कहते तो वह बोलती खुद लगा दो। 

अपनी व्यथा सुनाती महिला। - फोटो : अमर उजाला
बिना पीपीई किट के कोरोना पॉजिटिव को आठ घंटे में चार बार उसने और चार बार उसकी पत्नी ने क्लिप लगाया। दवाएं लिखकर दी, जिन्हें मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाना पड़ा। ऑन ड्यूटी डॉक्टर बाहर घूम रहे थे। एक बार भी डॉक्टर देखने नहीं आए। सुबह छह बजे बाहर जाते डॉक्टर से मरीज को देखने की गुहार लगाई लेकिन वह अभी लौटकर आने की बात कहकर निकल गए  फिर लौटे ही नहीं। 

छोटी शीशी में जो जूस व एक पॉलीथीन में थोड़ी खिचड़ी परिजनों ने दी थी। वह भी शव के साथ ही वापस आ गई। आरोप है कि वीआईपी मरीजों की अच्छी देखभाल की जा रही है। जब शव श्मशान घाट पहुंचे तो वहां कुत्ते घूमते मिले। अंतिम संस्कार के लिए देशी घी व अन्य सामग्री लाए लेकिन यहां स्टाफ ने सबसे पहले डीजल की मांग की। 

आनन-फानन में जैसे तैसे शव के ऊपर कुछ लकड़ी रखकर डीजल डालकर आग लगा दी। बहुत कहने पर दो परिजनों को पीपीई किट दी तो वह शव के पास गए। यहां शव की राख (फूल) पड़ी थी, उसके ऊपर से वाहन गुजर रहे हैं, स्टाफ जूते पहनकर निकलता है। घटना की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

यह तो अमानवीयता की हद है, सरकार कोरोना के मृतकों के शवों का दाह संस्कार कराने में अक्षम है तो जनसेवा दल के अपना आशियाना को यह जिम्मेदारी सौंप दें। हम, लोग अपने परिजनों की तरह सभी शवों का रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करेंगे। शव को डीजल डालकर जलाना सनातन दाह संस्कार परंपरा का अपमान है। -चरनजीत बाली, प्रधान जन सेवा दल करनाल।             

शव को डीजल डालकर जलाना, अस्थियों व चिता की राख के ऊपर से गाड़ियों का गुजरना, स्टाफ का जूते पहनकर फूल रौंदना, उनके ऊपर से पशुओं का घूमना, शमशान घाट पर पहली डिमांड डीजल होना, आखिर यह सब क्या है ? ऐसा अपमान तो शायद ही किसी ने देखा और सुना होगा। -राज कुमार अरोड़ा, अपना आशियाना करनाल।      

कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की कोरोना मरीजों के उपचार की व्यवस्था, नगर निगम की अंतिम संस्कार व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। कभी बिना जांच किसी को पॉजिटिव बता देना, किसी को पहले निगेटिव, फिर पॉजिटिव बताकर चिता से शव को उठवा लेना, कोरोना शमशान घाट पर पानी, टीन शेड, गेट तक का न होना, डीजल से चिता जलाना आदि यह बताने को काफी है कि जिम्मेदार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किस तरह कर रहे हैं। शवों के अंतिम संस्कार का काम अपना आशियाना को सौंप देना चाहिए। -अशूं ग्रोवर, सेवादार अपना आशियाना करनाल।
 
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यहां घासफूस तो है नहीं, इसलिए चिता की लकड़ियों पर डीजल डालना पड़ता है लेकिन शव के ऊपर नहीं डालते हैं। नगर निगम से पांच क्विंटल लकड़ी, दो लीटर डीजल मिलता है। किसी से डीजल नहीं मंगाते हैं। पीपीई किट व मास्क, ग्लब्स आदि रेडक्रास से मिलते हैं। स्थान की कमी है, सिर्फ पांच दाह संस्कार स्थल है लेकिन शव कई आते हैं, पिछले 12 दिनों में 41 शव आ चुके हैं। फूल बीनने की परंपरा तीन या पांच दिन के बाद होती है, इसलिए बाहर खुले में चिता लगानी पड़ती है। -प्रवेश कुमार, सफाई निरीक्षक नगर निगम करनाल।

शमशान घाट पर दाह संस्कार करने का जिम्मेदारी नगर निगम की है। मेडिकल कॉलेज में उपचार बेहतर तरीके से हो रहा है। डॉक्टर व स्टाफ ड्यूटी भी लगातार कर रहे हैं। मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, बाहर से दवाइयां मंगाने जैसे आरोप निराधार है। लेकिन यदि किसी के पास दवाओं की स्लिप है तो वह उनके कार्यालय आकर दिखा सकता है। मामले जांच कराकर सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. जगदीश चंद्र दुरेजा, निदेशक-कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल।   

गलती प्रशासन की, भुगतना हमें पड़ रहा है
सोमवार को सदर बाजार निवासी 84 साल के बुजुर्ग की मौत के बाद कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बताकर शव को परिजनों को सौंप दिया लेकिन बाद में पॉजिटिव बताकर शव को चिता के ऊपर से उठवा लिया था, उनका परिवार इन दिनों परेशान है। घर के चारो ओर बल्लियां तो लगी ही है, आसपास का कोई व्यक्ति उनसे व उनके परिजनों से बोलता भी नहीं है, जबकि उनके घर से सभी 13 सदस्यों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। मृतक की बहू का आरोप है कि डॉक्टर पहले से जानते थे कि उसके ससुर कोरोना निगेटिव है, क्योंकि उनका सैंपल बिना पीपीई किट के लिया गया, जबकि अन्य सभी को पीपीई किट पहनकर ही लिया जाता है।
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