पानीपत। प्रदेश में दो गांवों को जोड़ने वाली सड़कें अब मार्केटिंग बोर्ड के बजाय जिला परिषद बनाएगा। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश के पांच जिलों की सड़कों का काम मार्केटिंग बोर्ड से लेकर जिला परिषद को सौंप दिया है। प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। जिला परिषद ने इस दिशा में काम शुरू भी कर दिया है।
दो गांवों को जोड़ने वाली सड़कें अब तक मार्केटिंग बोर्ड बनवाता आ रहा है। इसके लिए अलग से इंजीनियरिंग टीम काम कर रही है। वहीं कुछ सड़कों का काम जिला परिषद भी कराता है। सरकार ने मार्केटिंग बोर्ड से ऐसी सड़कों का काम लेकर जिला परिषद को देना शुरू कर दिया है। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट में करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, फतेहाबाद व गुरुग्राम को शामिल किया है।
मार्केटिंग बोर्ड दो गांवों या खेतों से मंडी तक आने वाले रास्तों का रखरखाव करता है। इसके साथ मंडी व खरीद केंद्रों की सड़कों की मरम्मत व नव निर्माण का कार्य भी करता है। जिला परिषद अब इंजीनियरिंग के कार्य कराने लगा है। जिला परिषद के सदस्यों को इसके लिए कई बार मार्केटिंग बोर्ड तो कई बार पंचायती राज विभाग के कार्यालय जाना पड़ता है। ऐसे में सड़कों का निर्माण व मरम्मत कार्य उलझ जाता है।
जिला पार्षद को सड़क बनवाने के लिए एक-दूसरे विभाग में जाना पड़ता है। कई बार कई कार्यालयों में जाने के बाद भी काम नहीं हो पाता। इन सबके चलते लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पाता। जिला पार्षद कई बार इसकी मांग उठा चुके हैं। अब कुछ रास्ता निकलता नजर आ रहा है।
- आर्य सुरेश मलिक, उपाध्यक्ष, जिला परिषद पानीपत।
मार्केटिंग बोर्ड की सड़कों को जिला परिषद के अंतर्गत किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट में पांच जिलों को शामिल किया गया है। यहां कार्य सफल होता है तो प्रदेश के बाकी जिलों में इसे लागू किया जाएगा। इसके बाद सीधे जिला परिषद सड़कों का निर्माण व मरम्मत कार्य कराएगा।
- विवेक चौधरी, सीईओ, जिला परिषद पानीपत।