पानीपत/बापौली। कस्बे के दो समाज चिंतकों ने 1999 में जब युवाओं को नशे की गिरफ्त में आते देखा तो उन्होंने संजय पार्क में दंगल का आयोजन शुरू कराया और युवाओं को कुश्ती मुकाबलों के लिए जागरूक करना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद कुछ पूर्व पहलवान भी उनके साथ आ गए और युवाओं को दांव पेंच सिखाने लगे। धीरे धीरे संजय पार्क में आयोजित कुश्ती मुकाबलों में युवाओं की भीड बढ़ती गई। अब हर रविवार की शाम को आयोजित होने वाले दंगल में उत्तर प्रदेश, हरियाणा व उत्तराखंड के 100 से ज्यादा पहलवान भाग लेते हैं। दंगल जीतने वाले पहलवानों को नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है। अब बापौली खंड के 40 से अधिक गांवों के युवा कुश्ती सीखकर और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेकर कई पदक हासिल कर चुके हैं। इन युवाओं ने कुश्ती मुकाबलों के माध्यम से गांवों की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई है। अब बापौली खंड के 40 से अधिक गांवों के युवा नशे की दलदल को छोड़ खेलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
यमुना सुधार समिति के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट रतन सिंह रावल व बापौली पर्यावरण एवं जल सुधार समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल रावल की ओर से 25 साल पहले युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए लगाया गया दंगल रूपी छोटा पौधा आज विशालकाय पेड़ बन चुका है। पहलवान इस दंगल जीतने के लिए जी जान लड़ा देते हैं। दंगल को देखने के लिए भी दूर दूर से लोग आते हैं।
एडवोकेट रतन सिंह रावल व राजपाल रावल ने बताया कि हर रविवार को संजय पार्क आयोजित होने वाले दंगल में दूर-दूर से पहलवान अपनी प्रतिभा दिखाने आते हैं। बापौली के हर गांव में 10 से अधिक प्रदेश स्तरीय पहलवान हैं। उनका प्रयास है कि युवाओं को नशे से दूर रखा जाए। पूरे क्षेत्र के लोग दंगल को पसंद करते हैं। उन्होंने खंड के युवा पहलवानों को दांव पेंच सिखाने के लिए उच्च स्तरीय कोच भी उपलब्ध कराए है। 10 वर्ष की आयु के बच्चे स्कूल से आने के बाद संजय पार्क में अभ्यास के लिए आ जाते हैं। पहलवानों को हर संभव मदद भी उपलब्ध कराई जाती है। उनकी युवाओं से अपील है कि वो नशे की दलदल से दूर रहें। अपने शरीर का ख्याल रखें।