पानीपत। युवा जल्द अमीर बनने की चाहत में मादक पदार्थ तस्करी की राह पकड़ रहे हैं। यु्वा बिना मेहनत कम समय पर अमीर बनने की चाह रखते हैं। अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिए उनको इससे बेहतर रास्ता नजर नहीं आता। इस धंधे में उनको जल्द पैसा तो मिल जाता है लेकिन उनको जीवन का एक बड़ा पड़ाव जेल की सलाखों के पीछे गुजरना पड़ता है। जेल से जमानत पर आने के बाद भी इसी धंधे में शामिल रहते हैं। 2023 में पानीपत पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के आरोपों में 150 से अधिक युवाओं को गिरफ्तार किया है। इस साल जनवरी व फरवरी में पुलिस ने ऐसे 25 युवाओं को गिरफ्तार किया है जो मादक पदार्थ तस्करी कर जल्द अमीर बनना चाहते थे। अब ये सलाखों के पीछे हैं।
यमुना से सटा राणा माजरा गांव नशे की दलदल में फंसा है। राणा माजरा गांव के युवा मादक पदार्थ तस्करी के रास्ते पर जाकर शार्टकट तरीके से अमीर बनने का रास्ता अपना रहे हैं। ये ही रास्ता उन्हें सलाखों के पीछे भी पहुंचा रहा है। राणा माजरा गांव के लगभग 50 युवा मादक पदार्थ तस्करी के आरोपों में जेल काट रहे हैं। पांच साल में लगभग 40 युवा नशे की दलदल में फंसकर अपनी जान भी गवां चुके हैं। घरों के इकलौते चिराग बुझ रहे हैं। अब उनके परिजन दयनीय हालत में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
नशे की दलदल में फंसे युवाओं को अपनेपन का अहसास कराने व उन्हें नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए पुलिस ने यहां कई प्रकार की गतिविधियां शुरू की है। युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है। पुलिस के जवान खुद राणा माजरा गांव के युवाओं के साथ क्रिकेट व वॉलीबाल खेलते हैं। उन्हें अपने स्तर पर खेल का सामान भी उपलब्ध कराते हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को पुलिस अपने स्तर पर शिक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश भी करती है। अब पुलिस की ये कोशिश कामयाब भी होती दिखाई दे रही है।
केस एक
- शुक्रवार रात को एंटी नारकोटिक्स सेल ने गांव आसन कलां से भारतीय महिला वालीबॉल टीम की कप्तान निर्मल तंवर के भाई अंकित को 600 ग्राम चरस के साथ पकड़ा गया था। शार्टकट तरीके से पैसे कमाने के लिए वह मादक पदार्थ तस्करी के धंधे में आया था। पुलिस ने उससे पूछताछ के बाद इस धंधे से जुड़े तीन लोगों को पकड़ा था।
केस दो
- एंटी नारकोटिक्स सेल ने 27 फरवरी को बीबीएमबी के पास से खोतपुरा गांव के सुनील को डेढ़ किलो चरस के साथ पकड़ा। पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि वो जल्द अमीर बनाना चाहता है। जल्द अमीर मादक पदार्थ तस्करी में ही बना जा सकता है। इसलिए वो इस धंधे में आया था। वो चरस बेचकर काफी पैसे कमाना चाहता था।
बॉक्स
ऐसे होती उत्तरप्रदेश से हरियाणा में नशे की तस्करी-
राणा माजरा गांव से करनाल, जींद, अंबाला और दिल्ली तक के लिए नशा तस्करी होती है। इस गांव के युवाओं को स्मैक की ऐसी लत है कि पूरे दिन यमुना नदी के किनारे जमा रहते हैं। इस गांव की नशा तस्करी का सबसे बड़ा कनेक्शन यमुना नदी ही है। यमुना नदी के पार उत्तरप्रदेश की सीमा शुरू होती है और वहीं से नशा तस्करी का सारा खेल शुरू होता है। यमुना पार से नशा तस्कर ट्यूब या नांव के सहारे इस गांव में आते हैं और मादक पदार्थ बेचकर वापस चले जाते हैं।
वर्जन-
एंटी नारकोटिक्स सेल के प्रभारी संदीप सिंह ने बताया कि युवा जल्द पैसे कमाने व अमीर बनने के लिए मादक पदार्थ तस्करी के रास्ते पर चलते हैं। उनको तस्कर बहकाते भी हैं। युवा बिना मेहनत कर पैसा कमाना चाहते हैं। जबकि कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं होता । युवाओं से अपील है कि वो इस रास्ते को चुनें।