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चंद्रमा और मां लक्ष्मी की पूजा से आएगी सुख-समृद्धि

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पानीपत। पौष मास की पूर्णिमा सोमवार 17 जनवरी को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पौष पूर्णिमा कहलाती है। पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखने, चंद्रमा और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा और माता लक्ष्मी की पूजा से धन, दौलत और सुख में वृद्धि होती है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजा होती है। इससे शुभता और सौभाग्य बढ़ता है। सत्यनारायण भगवान को श्रीहरि विष्णु का अवतार मानते हैं।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि पौष पूर्णिमा सर्वार्थ सिद्धि योग में है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 04:37 बजे से अगले दिन 18 जनवरी को सुबह 07:15 बजे तक है। पूर्णिमा को पूर्णमासी भी कहते हैं। इसलिए इस दिन के चांद को पूर्णमासी का चांद कहते हैं। पूर्णमासी का अर्थ उस मास के पूर्ण होने से है। पंचांग में पूर्णिमा के बाद से नए माह का प्रारंभ होता है।
पौष पूर्णिमा 2022 तिथि एवं चांद निकलने का समय
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 17 जनवरी दिन सोमवार को अल सुबह 03 बजकर 18 मिनट पर हो रहा है। पूर्णिमा तिथि 18 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 05 बजकर 17 मिनट तक है। पूर्णिमा के चंद्रमा का उदय 17 जनवरी को होगा, इसलिए पौष पूर्णिमा 17 जनवरी को है। इस दिन पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा। पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के उदय का समय शाम को 05 बजकर 10 मिनट पर है। इस दिन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक है।
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