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बार-बार बीमारी की चिंता करने से बढ़ता है रोग : अरुण मुनि

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- अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में मनाया रोग मुक्ति दिवस
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में रोग मुक्ति दिवस मनाया गया। अरुण चंद्र महाराज ने इस पर विशेष प्रवचन दिए और स्वास्थ्य व अध्यात्म के संबंध पर प्रकाश डाला। उनके शिष्य अभिषेक मुनि, अभिनंदन मुनि भी मौजूद रहे।
अरुण मुनि ने प्रवचन की शुरुआत, जीवन के रास्ते में एक बात याद रखना, हर हाल में तू अपनी औकात याद रखना... से की। मुनि ने कहा कि प्रभु महावीर ने कई प्रकार से रोग मुक्ति के उपायों पर मार्गदर्शन दिया है। अस्थिर बदलता है, स्थिर कायम रहता है। शरीर अस्थिर है जिस कारण बदलता रहता है और आत्मा स्थिर है। स्वास्थ्य के बिना जीवन अधूरा है, और स्वस्थ तन-मन ही अध्यात्म की साधना का आधार है। रोग मुक्ति के पांच प्रमुख उपाय निर्जरा जैन आगमों में बताए गए बारह प्रकार के तपों से निर्जरा होती है और निर्जरा से शरीर निरोगी बनता है।
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अभय का विकास भय पर विजय प्राप्त करें, क्योंकि डर रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। बार-बार बीमारी की चिंता करने से रोग बढ़ता ही है घटता नहीं। मानसिक परिवर्तन प्रसन्नता, क्षमा और सकारात्मक सोच अपनाएं। आहार और औषधि शुद्ध, सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करें, जैसा अन्न, वैसा मन और वैसा ही तन। संविभाग जिसे बदला नहीं जा सकता, उसे शांत मन से स्वीकार करें। रोग मुक्ति केवल दवा से नहीं बल्कि सही सोच, सही आहार और संतुलित जैन जीवनशैली से संभव है। जिन वाणी को सुनना और समझना ही रोग मुक्त जीवन का सच्चा मंत्र है।
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आगामी रविवार को सामायिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। रविवार को बहन सुचेता जैन द्वारा 33 अयिम्बिल व्रतों की तपस्या करने पर समाज ने उन्हें सम्मानित किया। रविवार को अवकाश होने के कारण प्रवचन में स्थानीय और बाहर के अनेक स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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