पंचायती चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज को चुकी हैं और चुनावों को लेकर गांवों में जगह-जगह ग्रामीण इस पर चर्चा कर रहे हैं साथ ही प्रदेश की राजनीति पर पड़ने वाले प्रभाव को भी आंक रहे हैं। चुनाव को लेकर अमर उजाला संवाददाता ने गांव करहंस का दौरा कर गांवों के बड़े-बुजुर्गों सहित नौजवानों से भी उनकी राय जानी।
गांव में शिव मंदिर के पास बैठे लोगों से इस बारे में चर्चा की गई तो गांव के बलबीर ने बताया कि शराब व अन्य नशीली सामग्री बांटकर चुनाव लड़ना गलत है। इसकी जगह मिठाई के डिब्बे पहुंचा दें तो ज्यादा अच्छा है। सभी परिवार के सदस्यों को खुशी होगी और किसी को एतराज नहीं होगा। बाकी वोट तो सभी अपनी मर्जी से ही देंगे। कर्मवीर फौजी ने कहा कि शराब बांटने की बजाय अगर गांव में कोई सुधार करवा दें तो सभी की भलाई होगी। शराब बांटने से तो गांव का नुकसान ही होगा।
प्यारेलाल प्रधान का कहना है कि शराब बांटने से गांव में झगड़े ही होते हैं, जो चुनाव जीतने के लालच में शराब बांटने पर खर्च करते हैं, उनको चाहिए कि गांव में टैंट हाउस का सामान खरीदकर रख दें। ताकि गांव में किसी भी गरीब लड़की की शादी हो इससे उसका भला हो जाए। विक्रम सहरावत का कहना है कि शराब बांटने वाला कभी भी चुनाव नहीं जीतता। शराब पीने वाला सभी उम्मीदवारों से लेकर पी जाते हैं और बाद में हारने वाले प्रत्याशी के झगड़े होते हैं। कई बार तो झगड़ा विकराल रूप ले लेता है और जिसमें दोनों पक्षों को वर्षों मुकदमे भुगतने पड़ते हैं।