पानीपत। सेक्टर-25 स्थित तीन प्लॉटों को सस्तों दामों पर उद्यमियों को अलॉट करने का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। मामले में एसएचआईआईडीसी के पूर्व प्रबंध निदेशक हरिसिंह बांगड़ का नाम सामने आने और एंटी ब्यूरो करप्शन की कार्रवाई के बाद इस कड़ी से जुड़े अन्य लोगों की भी धड़कनें तेज हो गई हैं। ये तीनों प्लॉट एचएसआईआईडीसी के अंतर्गत आते थे। मामले की शिकायत उग्रा खेड़ी गांव के संदीप मलिक ने एचएसआईआईडीसी मुख्यालय को दी थी, जिसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू की।
उग्राखेड़ी के संदीप मलिक ने पंचकूला में मुख्य प्रशासक को 2020 में शिकायत दी थी। आरोप लगाया था कि क्षेत्रीय अधिकारियों ने पंचकूला के अधिकारियों से मिलीभगत कर सेक्टर-25 पार्ट-1 और सेक्टर-29 पार्ट-2 के पांच इंडस्ट्रियल प्लाॅट कलेक्टर रेट पर उद्यमियों को अलॉट करा दिए। प्लॉट वर्तमान रिजर्व प्राइस और कलेक्टर रेट में से जो भी अधिक हो। उस पर अलॉट करने थे लेकिन करंट रिजर्व प्राइस से तीन गुना कम कलेक्टर रेट पर अलॉट कर दिए गए। इन पांच प्लॉटों पर सरकार को आठ करोड़ का नुकसान हुआ है। इस शिकायत के बाद विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी थी।
इस संबंध में शिकायतकर्ता संदीप मलिक का कहना है कि सिर्फ तीन प्लॉटों की बात नहीं है। शहर में दर्जनों प्लॉट ऐसे कौड़ियों के भाव में बेचकर सरकार को चूना लगाया गया है। इस मामले में अब साढ़े तीन साल बाद कार्रवाई की जा रही है। आरोप है कि इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी मिले हैं। अगर सरकार मामले की गहनता से जांच करे तो इसमें कई कर्मचारी व अधिकारी घिरेंगे।