चुलकाना धाम में श्रीमद्भगवद्गीता कथा करते कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी। संवाद
- फोटो : परीक्षा की तैयारी में किताबों से ज्यादा अब एआई पर भरोसा
समालखा। चुलकाना धाम में आयोजित श्रीमद्भगवद्गीता सार कथा के तीसरे दिन वीरवार को कथा व्यास स्वामी रामदास हितैषी ने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गीता का गूढ़ ज्ञान और प्रभु के विराट स्वरूप का दर्शन करने के बाद अर्जुन का अज्ञान व मोह पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके बाद ही अर्जुन ने अपना गांडीव उठाकर धर्म व कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कथावाचक ने बताया कि कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में जब अर्जुन अपने ही परिजनों और गुरुजनों को सामने देखकर असमंजस में पड़ गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्म, आत्मा और धर्म का वास्तविक मर्म समझाया। श्रीकृष्ण ने उपदेश दिया कि मनुष्य का अधिकार केवल निष्काम कर्म करने पर है, फल की चिंता करना उसका काम नहीं है। आत्मा अमर है, जो न शस्त्रों से कटती है और न ही अग्नि में जलती है मृत्यु केवल नश्वर शरीर की होती है।
स्वामी ने कहा कि जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुख को समान मानकर अपने कर्तव्य का पालन करना ही श्रेष्ठ धर्म है। कथा में चुलकाना धाम की पौराणिक महत्ता का भी बखान किया गया। यहां वीर बर्बरीक ने श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से महाभारत युद्ध देखा था। कथा के दौरान भजन गायक कौशल राणा गुरुग्राम और पूजा आनंद दिल्ली ने भजनों के जरिए चुलकाना नरेश का गुणगान किया। इन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। संवाद
चुलकाना धाम में श्रीमद्भगवद्गीता कथा करते कथावाचक स्वामी रामदास हितैषी। संवाद- फोटो : परीक्षा की तैयारी में किताबों से ज्यादा अब एआई पर भरोसा