सनौली। पहाड़ों के साथ मैदानी क्षेत्र में बारिश होने से हथिनी कुंड बैराज से यमुना में एक दिन पहले छोड़ा करीब दो लाख क्यूसेक पानी सोमवार को पानीपत जिले की सीमा में पहुंच गया। एक साथ ज्यादा पानी आने पर जिले के पहले राणा माजरा गांव में तटबंध के अंदर खेतों में मिट्टी में कटाव हो गया। यहां पानी की दिशा बदलने के लिए बनाई मिट्टी के कट्टों के स्टड तक डूब गए। वहीं पत्थरों की ठोकर पूरी तरह से नहीं लग पाने पर आसपास के करीब डेढ़ दर्जन गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने सैकडों मजदूरों के साथ यमुना पर डेरा डाल लिया है।
यमुना के पानी ने गांव राणा माजरा के पास तटबंध के अंदर खेतों में कटाव करना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी यमुना का पानी तटबंध से दूर है, लेकिन गांव के किसान व ग्रामीण पानी के पहले ही दिन ही किए कटाव से चिंतित है। राणा माजरा के सरपंच प्रतिनिधि खुर्शीद अहमद, नवाब, नौसाद, राशिद, गयूर, हाजी इस्लाम, सुरेंद्र, विजय, मौलवी इस्लाम व शमशाद ने कहा कि सिंचाई विभाग को पत्थरों का पहले ही इंतजाम करना चाहिए था। देरी से पत्थर आए हैं। अब भी पत्थर यमुना किनारे पड़े हैं। पत्थरों की ठोकर अभी तक नहीं लगाई गई हैं। यह सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते हुआ है।
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ढाई करोड़ की लागत से बननी थी चार नई ठोकर
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार राणा माजरा गांव में करीब ढाई करोड़ की लागत से यमुना तटबंध पर पत्थरों की चार नई ठोकर बननी थी। ठेकेदार ने दो दिन पहले ही पत्थर डाले हैं। इन पत्थरों को नापने के लिए स्टेप में लगवाया गया हैं। इसके बाद ही पत्थरों की ठोकर लगवाई जाएगी। इससे पहले यमुना नदी के बढ़े जलस्तर से बांध के नजदीक बढ़ते पानी से कटाव होने लगा हैं। इसी तरह कटाव बढ़ता रहा तो राणा माजरा गांव में तटंबध टूटने से बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाएगा।
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इस बार ठेकेदार को समय पर पत्थर नहीं मिल पाए। जिसके चलते पत्थरों की ठोकर नहीं लगाई जा सकी। यहां मिट्टी के कट्टों के स्टड लगाए गए हैं। राणा माजरा गांव में ही 11 स्थानों पर स्टड लगाए गए हैं। जेसीबी व पोकलेन मशीन से जल्द ही ठोकर लगाई जाएंगी।
सुरेश सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।