पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत पहले से ही पानी के संकट से गुजर रहा है। शहरी क्षेत्र में भूजल लगातार नीचे जाने से ट्यूबवेलों से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा हैं। अब पंजाब की ओर सेे नहरी पानी की कटौती करने से शहर के साथ ग्रामीण अंचल के लिए भी चिंता का विषय है।
जानकारी के अनुसार पानीपत से दिल्ली पैरलल और कैरियर लाइन चैनल नहर होकर जाती हैं। कैरियर लाइन चैनल में दिल्ली के लिए पानी जाता है। यह करीब 750 क्यूसेक पानी है। इसमें मांग अनुसार कम या अधिक किया जाता है। पानीपत दिल्ली पैरलल नहर में करीब दो हजार क्यूसेक पानी चलता है। ये दोनों नहर सोनीपत के खुबडू झाल पर एक हो जाती हैं। यहां से पानी आगे रोहतक, भिवानी ब्रांच के साथ दिल्ली में सप्लाई किया जाता है। पानीपत में नहरी पानी पर मतलौडा व इसराना के करीब 70 गांव आश्रित हैं। पानी की कमी में इन गांवों में दिक्कत आ सकती है।
शहर में पेयजल के व्यवसायिक प्रयोग पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। नगर निगम के आयुक्त डाॅ. पंकज यादव ने इसके आदेश जारी किए थे। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि पीने योग्य पानी से प्रतिदिन गाड़ी धोने के साथ और गलियों की सफाई की जाती है। वॉशिंग स्टेशनों पर इसका लगातार प्रयोग किया जा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के बड़े ट्यूबवेल की गहराई करीब 1200 फीट तक पहुंच चुकी है, जबकि 10 साल पहले यह 200 फीट तक थी। शहर में करीब 635 ट्यूबवेल हैं। जिनसे रोजाना करीब 122 एमएलडी तक पानी निकाला जा रहा है।
चिंताजनक स्थिति ःसिवाह गांव में 52.70 मीटर पर पानी है। करहंस में 45.38 मीटर पर है। नुरपुर मुगलान 46.40, उग्राखेड़ी में 49.01, सिवाह खेड़ी में 47.46, गांजबड़ में 44.88, राजाखेड़ी में 46.06, पसीना खुर्द में 45.90 मीटर पर पानी है। जिले के 192 में से 60 गांव रेड जोन में हैं। अकेले पानीपत और समालखा खंड में 48 गांव रेड जोन में हैं। यहां भूजल 140 फीट से नीचे जा चुका है। सिवाह गांव भूजल स्तर 52.70 मीटर तक पहुंच गया है। वहीं शहर में औद्योगिक इकाइयों में भी पीने योग्य पानी का प्रयोग किया जा रहा है। ब्यूरो