हरियाणा के जिले कैथल में हरियाणा सरकार की महत्वपूर्ण योजना हरियाणा स्वास्थ्य एंबुलेंस सेवा 102 जिले में दम तोड़ने लगी है। कुल 13 एंबुलेंस गाड़ियों में से नौ गाड़ियों के पहिए रूक गए हैं।
इसमें से आठ खराब हालत में खड़ी हैं तो 1 गाड़ी दुर्घटना के बाद बंद पड़ी है। पूरे जिले की 10 लाख की आबादी मात्र चार गाड़ियों के सहारे है। इससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों को 24 घंटे एंबुलेंस सेवा मुहैया करवाए जाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भूरेंद्र सिंह हुड्डा ने स्वयं इस परियोजना का शुभारंभ किया था। इसके तहत जिले में 13 एंबुलेंस गाड़ियां चल रही थीं।
लेकिन अब इनके काफी पुराना होने के पिछले कई दिनों से एक-एक नौ गाड़ियां खराब होती चली गई।
चालू एंबुलेंस भी पुराना
पहले से ही पीड़ित लोगों को लाने-जाने में काम आ रही चालू हालत की एंबुलेंस गाड़ियां भी काफी पुरानी हो चुकी हैं। इनमें कई गाड़ियां अपनी तय दूरी को पूरा कर चुकी हैं। फिर भी उन्हें दौड़ाया जा रहा है। जो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
सुबह अस्पताल में नागल से आए एक मरीज ने बताया कि उसके बेटे की घरवाली को डिलीवरी के बाद जब वह एंबुलेंस लेने के लिए कंट्रोल रूम में पहुंचा तो उसे एंबुलेंस नहीं है बोलकर बाहर निकाल दिया गया।
उन्होंने बताया कि अस्पताल से उसकी लड़के की बहु को डिलीवरी के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है, लेकिन उसके पास न तो उसको घर ले जाने के लिए प्राइवेट वाहन किराए पर करने के लिए पैसे हैं और न ही एंबुलेंस का प्रबंध हो रहा है।
कुछ एंबुलेंस चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दो बजे के बाद डिलीवरी केस काफी संख्या में अस्पताल के गेट पर बैठे रहते हैं और चार-चार घंटे इंतजार करने के बाद भी उन्हें एंबुलेंस की सेवाएं नसीब नहीं होती है।
आपात स्थिति के लिए मात्र एक एंबुलेंस
सोमवार को अस्पताल प्रशासन के पास सिर्फ एक एंबुलेंस मौजूद थी और एक एंबुलेंस चंडीगढ़ पीजीआई मरीज को लेकर गई थी। जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन किसी बड़ी घटना यह आपात स्थिति से किस तरह निपटेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं था।
एंबुलेंस चालकों ने बताया कि उन्हें एक वर्ष से नई एंबुलेंस देने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक एक भी नई एंबुलेंस नहीं पहुंची है और जो हैं वह सभी दो लाख से तीन लाख किलोमीटर चल चुकी हैं।