पानीपत। पिछले 10 साल में पानीपत का भूजल स्तर 15 फुट नीचे जा चुका है। हर रोज पानीपत में आठ करोड़ लीटर पानी का दोहन हो रहा है। अब भूजल को बचाने के लिए हरियाणा भूजल प्राधिकरण ने सख्ती शुरू कर दी है। शुक्रवार को लघु सचिवालय में डीसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की असिस्टेंड डायरेक्टर ने उद्यमियों के साथ मीटिंग की। मीटिंग में अधिकारियों ने उद्यमियों को चेतावनी दी कि अगर बिना परमिशन के भूजल का दोहन किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा भूजल प्राधिकरण ने प्रतिदिन 10 हजार लीटर पानी का दोहन करने वालों के लिए भी अनुमति अनिवार्य कर दी है। इससे उद्यमियों में रोष है। अधिकारियों की इस चेतावनी पर उद्यमियों ने कहा कि वो परमिशन के लिए आवदेन कर चुके हैं । अब तक परमिशन नहीं मिली। वो परमिशन मिलने तक उद्योग कैसे बंद करें।
उद्यमियों ने मीटिंग में कहा कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण सरकार को 24 घंटे पानी देने के नाम पर गुमराह कर रहा है। उन्हें दिन में 10 घंटे ही पानी मिलता है। उनकी मशीनें हाई टेंपरेचर वाली हैं। मशीनों को 24 घंटे पानी चाहिए। वो सरकार को करोड़ों रुपये टेक्स दे रहे हैं सरकार का फर्ज बनता है कि उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराएं। मीटिंग में प्रीतम सचदेवा व ललित गोयल भी मौजूद रहे।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कमलजीत सैनी ने बताया कि अब तक जिले के महज 256 उद्यमियों ने ही भूजल दोहन के लिए आवेदन अप्लाई किया है। जिन उद्यमियों ने अप्लाई नहीं किया है। वो अप्लाई कर लें। भूजल प्राधिकरण बिना अनुमति के भूजल का दोहन करने वालों पर कार्रवाई करेगा। उन्होंने उद्यमियों से प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने की अपील की है।
बाक्स
जितना पानी इस्तेमाल कर रहे हैं सिर्फ उसी का बिल लें- भीम
मीटिंग में डायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भीम राणा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। भीम राणा ने कहा कि समय पर उन्हें पानी नहीं मिलता। पानी की कमी के कारण बॉयलर फट सकता है। इसका जिम्मेदार कौन होगा। करोड़ों की मशीनें खराब हो सकती हैं। किसी उद्यमी को दो लाख लीटर पानी का दोहन करने की परमिशन है। अगर वो 50 हजार लीटर ही पानी का दोहन करता है तो उससे दो लाख लीटर पानी का बिल क्यों लिया जाता है। उद्यमियों को 24 घंटे पानी की जरूरत है। आवेदन करने के बाद भी उद्यमियों को भूजल के दोहन की अनुमति नहीं मिलती।