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9 फाइनेंसरो ने टायर कारोबारी पर डाला रुपये लौटाने का दबाव, जहरीला पदार्थ खाकर की आत्महत्या

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सेक्टर-18 निवासी एक टायर कारोबारी ने नौ फाइनेंसर्स की ओर से उनकी रकम लौटाने के दबाव में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। कारोबारी के पिता ने बताया कि कोरोना काल में बेटे ने टॉयर के व्यापार को बढ़ाने के लिए उग्राखेड़ी के तीन फाइनेंसर्स समेत कुल नौ फाइनेंसर्स से 15 से 20 लाख रुपये ब्याज पर लिए थे, जिसमें से कुछ रकम बेटा लौटा भी चुका था, लेकिन गत एक सप्ताह से फाइनेंसर लगातार रकम लौटाने का दबाव बना रहे थे, जिस पर बेटे ने आत्महत्या कर ली, जिसकी उनके पास रिकार्डिंग और स्क्रीनशॉट है। सेक्टर-12 चौकी पुलिस ने सभी फाइनेंसर के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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पुलिस को दी शिकायत में राजेंद्र पाल सिंह निवासी सेक्टर-18 ने बताया कि दो बेटों में छोटा जपनीत सिंह (24) है। उनकी सनौली रोड पर बलवंत टायर के नाम से दुकान है, जिसे छोटा बेटा संभालता है। बेटे ने व्यवसाय बढ़ाने के लिए फाइनेंसर्स से ब्याज पर रुपये लिए थे। शनिवार दोपहर दो बजे बेटे ने फोन किया और बताया कि वह मित्तल मेगा मॉल के पीछे खड़ा है। वह सभी फाइनेंसर्स की कुछ रकम धीरे-धीरे लौटा चुका है, लेकिन फिर भी उसे पर तुरंत रकम लौटाने का दबाव बनाया जा रहा है। जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इससे परेशान होकर उसने जहर खा लिया है और सांस नहीं ले पा रहा है। बेटे की बात सुन वह मौके पर पहुंचे तो बेटा कार के शीशे पर बेसुध हालत में पड़ा हुआ था। बेटे को लेकर देवी मंदिर नजदीक एक निजी अस्पताल में पहुंचे, जहां रविवार की शाम सात बजे उपचार के दौरान जपनीत की मौत हो गई।
पिता ने बताया कि जब वह बेटे जपनीत को सेक्टर 25 से अस्पताल लेकर जा रहा था, उसी बीच रास्ते में बेटे ने बताया कि उसने बिंटू निवासी निंबरी, विनोद निवासी उग्राखेड़ी, ग्रीन मलिक निवासी उग्राखेड़ी, राजेश, नवदीप निवासी उग्राखेड़ी, नन्हा कुराड़, बिल्लू सिवाह, विशाल जागलान व खुशीराम जागलान निवासी असंध रोड ने उस पर रकम लौटाने का दबाव बनाया।
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मृतक के बड़े भाई जसमीत ने बताया कि उसके भाई को फाइनेंसर करीब एक सप्ताह से धमकी दे रहे थे। उसने करीब 15-20 लाख रुपये 20 प्रतिशत ब्याज पर लिए थे। उसने आरोप लगया कि छोटा भाई हर माह फाइनेंसर्स को रकम देता था, लेकिन वे उसे ब्याज में ही अडजस्ट कर देते थे। पिछले बुधवार से फाइनेंसर कॉल और मैसेज कर जान से मारने की धमकियां देने लगे। दुकान पर आकर भी रकम लौटाने का दबाव बनाया।
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