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ईको सवार बदमाशों ने हथियार के बल पर दो छात्रों का किया अपहरण

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इको सवार चार बदमाश हथियार के बल पर देहरा वासी दो छात्रों का अपहरण कर ले गए। दोनों दसवीं कक्षा में अलग अलग स्कूल में पढ़ते हैं। घसौली के पास जैसे ही बदमाशों ने शराब के ठेके पास गाड़ी रोक खिड़की खोली तो दोनों छात्र उतरकर भाग निकले। जो कई किलोमीटर खेतों से होकर सनपेड़ा रोड स्थित एक धर्मकांटे पर पहुंचे और वहां से स्वजनों को सूचना दी। दोनों बच्चों की तलाश में जुटे स्वजनों ने राहत की सांस ली और बच्चों को वहां से लाकर सरपंच के साथ थाना लेकर पहुंचे। जहां शिकायत देकर पुलिस से बदमाशों का पता लगा कार्रवाई की मांग की। छात्र शुभम और राहुल ने बताया कि मंगलवार को स्कूल से छुट्टी के बाद वो दोनों गांव से महावटी रोड स्थित खेहत में घूमने के लिए गए थे। जैसे ही साढ़े तीन बजे के करीब खेत से सड़क पर चढ़े तो महावटी की तरफ से एक ईको उनके नजदीक आकर रुकी। उसमें से तीन युवक उतरे। जिनमें से दो ने पिस्टल ले रखी थी। दोनों ने उन्हें पिस्टल दिखाते हुए गाड़ी में बैठने के लिए कहा। उन्होंने मना किया तो धमकी देते हुए जबरदस्ती गाड़ी में डाल लिया और वापस महावटी की तरफ लाते हुए अलग-अलग गांव में ले गए। जब भी वो कुछ बोलते तो धमकाने लगते। उन्होंने बताया कि बदमाश गाड़ी को घसौली गांव के पास एक शराब के ठेके पर लेकर पहुंचे और उतरकर शराब लेने लगे। तभी खिड़की खुली होने का फायदा उठा दोनों छात्र बदमाशों के चुंगल से निकलने में कामयाब हो गए। इसके बाद वो खेतों से होते हुए सनपेड़ा रोड स्थित हनुमान धर्मकांटा पर पहुंचे और वहां मौजूद व्यक्ति को घटना बारे अवगत कराया। फिर उसने छात्रों के स्वजनों को फोन कर उनके सुरक्षित होने की सूचना दी। जहां से स्वजन उन्हें लेकर आए। छात्रों ने बताया कि बदमाश बार बार आज फिर दो फंस गए बोल रहे थे।
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दोनों हैं इकलौते चिराग
सरपंच मामन छाछिया ने बताया कि दोनों छात्रों के पिता खेतीबाड़ी करते है। दोनों अपने घरों के इकलौते चिराग है। जब वो शाम छह बजे तक भी घर नहीं पहुंचे तो स्वजन उनकी तलाश में जुट गए। काफी तलाश के बाद भी दोनों नहीं मिले तो वो परेशान हो गए। लेकिन जैसे ही साढ़े सात बजे के करीब उनके पास दोनों को मिलने का फोन आया तो उन्होंने राहत की सांस ली।
डर के मारे हुआ बुखार
बदमाशों द्वारा हथियार दिखाने के कारण दोनों छात्र इतने डरे हुए थे की राहुल को बुखार तक चढ़ गया। उसने बताया कि वो खिड़की खुली होने पर उतरकर भागे और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कई किलोमीटर तक दौड़कर अपनी जान बचाई। वहीं, शुभम के मन में भी घटना का खौफ इतना था की वो कुछ ठीक से बोल तक नहीं पा रहा था। जांचकर्मी सुरेश कुमार का कहना है कि बच्चों से बयान लेने का प्रयास किया गया, लेकिन सहमे होने के कारण ब्यान नहीं लिए जा सके। मामले की जांच जारी है।
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