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80 करोड़ से बन रहे दो एसटीपी प्लांट, रोजाना होगा चार करोड़ लीटर पानी शोधित

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पानीपत। नगर निगम 80 करोड़ की लागत से शहर में दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ( एसटीपी) लगाने जा रहा है। इनमें रोजाना चार करोड़ लीटर गंदे पानी को शोधित किया जाएगा। इससे निगम क्षेत्र के 8 वार्डों की 40 कॉलोनियों के करीब 3 लाख लोगों को निकासी के गंदे पानी और बरसाती पानी की जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। वहीं ट्रीट करने के बाद इस पानी को खेती, बागवानी, फायर ब्रिगेड के साथ ही उद्योगों को आपूर्ति किया जाएगा। जिससे भूजल की बजच होगी। पीने योग्य पानी का संरक्षण हो सकेगा।
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खास बात ये है कि इस पानी को अगर खेती के काम के लिए इस्तेमाल किया जाए तो सबसे बेहतर होगा। क्योंकि इस पानी में 50 से लेकर 70 प्रतिशत तक की यूरिया की मात्रा बताई जा रही है, जो खेती के लिए उपयोगी साबित होगी। इससे पानी के साथ-साथ किसानों को यूरिया की बचत भी होगी। निगम का ये ऐसा प्रोजेक्ट है, जिससे समस्याओं का समाधान तो होगा ही साथ में हर वर्ग को फायदा होगा।
यहां बनाए जा रहे एसटीपी
नगर निगम बरसत रोड पर कृपाल आश्रम के पास अपनी करीब पौन चार एकड़ की जमीन पर 25 एमएलडी का एसटीपी लगा रहा है। इसका टेंडर होने के बाद वर्क आर्डर जारी कर दिया गया है। इस पर काम भी शुरू हो चुका है। यहां नूरवाला बेल्ट, तहसील कैंप एरिया की कई कॉलोनियों का गंदा पानी आता था। जिससे यहां गंदे पानी का जोहड़ बन चुका था। निगम ने इस जोहड़ की सफाई तक करवा दी है और इसकी चाहरदीवारी का काम करवाया जा रहा है। इस एसटीपी से वार्ड नंबर एक से लेकर पांच तक की करीब 25 कॉलोनियों की निकासी के गंदे पानी को शोधित किया जाएगा।
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दूसरी तरफ वार्ड नंबर-24 के अंतर्गत आने वाली गोपाल कॉलोनी में 15 एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रति दिन की क्षमता का एसटीपी लगाया जा रहा है। इसमें वार्ड नंबर 24 से लेकर 26 तक की करीब 15 कॉलोनियों के गंदे पानी को शोधित किया जाएगा। यहां निगम ने टेंडर के माध्यम से करीब तीन एकड़ जमीन पर एसटीपी का काम शुरू करवा दिया है। इन कॉलोनियों का गंदा पानी मुख्य सीवर लाइन से होते हुए एसटीपी तक जाएगा। जिसके बाद इसे ट्रीट कर दूसरे उपयोग में लिया जाएगा।
यहां इस्तेमाल किया जाएगा पानी, होगी भूजल की बचत
इन दोनों एसटीपी से प्रति दिन चार करोड़ लीटर पानी का शोधन होगा। ये पानी खेती बाड़ी, बागवानी, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों और डाई हाउसों को दिया जाएगा। इसके अलावा ये पानी पीने के अलावा सभी जगह इस्तेमाल करने लायक बनाया जाएगा। इससे रोजाना हो रहे भूजल की बचत होगी। जो पानी पहले खेती या अन्य चीजों के लिए इस्तेेमाल होता आा है उसकी बचत होगी।
50 से 70 प्रतिशत होगी यूरिया की बचत
नगर निगम के जेई अजय छौक्कर ने बताया कि 15 एमएलडी वाले ट्रीट हुए पानी को मुख्य रूप से उस तरफ के खेतों के लिए दिया जाएगा। इस पानी में यूरिया की मात्रा 50 से लेकर 70 प्रतिशत तक होती है, जो खेती या बागवानी के लिए काफी उपयोगी होती है। अगर किसान अपने खेतों की सिंचाई इस पानी से करेंगे तो उन्हें कम यूरिया लगाना होगा। इससे पानी के साथ साथ किसानों की यूरिया की भी बचत होगी।
बारिश और गंदे पानी से भर जाती थी ड्रेन नंबर-1, होता था जलभराव
जेई अजय छौक्कर बताते हैं कि निगम के ग्रामीण वार्डों की इन कॉलोनियों में निकासी की बड़ी समस्या थी। वार्ड नंबर 24 से ड्रेन नंबर-1 की शुरुआत होती है। यहां से लेकर नूरवाला और अन्य कॉलोनियों की गंदे पानी की सप्लाई तक ड्रेन नंबर-1 में होती आई है। नूरवाला साइड की कॉलोनियों ज्यादा नीचे हैं। यहां जलभराव की समस्या रहती है। ड्रेन नंबर वन की कैपेसिटी भी पूरी हो जाने से ड्रेन ओवरफ्लो हो जाती थी। बरसाती दिनों में तो इन कॉलोनियों में पांच पांच फीट तक पानी जमा हो जाता था। जिनसे अब इन कॉलोनियों के लोगों को राहत मिलेगी।
लाखों लोगों को होगा फायदा, बचेगा पीने का पानी- एक्सईएन
नगर निगम के इस प्रोजेक्ट से शहर के लाखों लोगों को गंदे पानी की निकासी और जलभराव जैसी समस्या से निजात मिलेगी। रोजाना चार करोड़ लीटर जल का शोधन होगा। इसे औद्योगिक इकाइयों समेत फायर ब्रिगेड, खेती, बागवानी को दिया जाएगा। जिससे इनमें जो भूजल पहले लग रहा था उसकी बचत होगी। ये एक ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिससे आम आदमी से लेकर उद्योगपतियों और किसानों को भी फायदा होगा।
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- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।
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