पानीपत। शहर के कायस्थान मोहल्ला में दो बहनों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। करीब छह महीने से बंद थीं। वे सामने मंदिर और धर्मशाला से प्रसाद और भंडारे से पेट भर रही थीं।
समाजसेवी लोगों की सूचना पर बुधवार दोपहर बाद पुलिस पहुंची। जन सेवा दल और पुलिस ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला और मेडिकल जांच के लिए सामान्य अस्पताल पहुंचाया। बड़ी बहन के रीड की हड्डी में चोट है, जबकि छोटी का मानसिक संतुलन बिगड़ा है। कायस्थान मोहल्ला निवासी दुलीचंद की 10 साल पहले कैंसर के चलते मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी शकुंतला बड़ी बेटी 35 वर्षीय सोनिया और छोटे बेटी 30 वर्षीय चांदनी के साथ रहने लगी। शकुंतला फैक्टरी में काम करती थी। पति की मौत के पांच साल बाद उनकी भी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
इसके बाद सोनिया और चंचल को सदमा लगा। उन्होंने एक कंपनी में काम शुरू किया। छह माह पहले सोनिया की सब्जी खरीदते वक्त पैर फिसलने से चोट लग गई। कुछ दिन बाद सोनिया की बाथरूम में फिसलने से रीड की हड्डी टूट गई। उन्होंने खुद को मकान में बंद कर लिया। समाजसेवी सुनीता वर्मा ने बताया कि उसने बुधवार को उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने बात नहीं की। उसने दोपहर बाद करीब तीन बजे पुलिस को सूचना दी।
थाना शहर प्रभारी जाकिर हुसैन मौके पर पहुंचे। उन्होंने करीब दो घंटे खिड़की से दोनों बहनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। समाजसेवी सुरभि शर्मा ने भी काउंसिलिंग की। जनसेवा दल से प्रधान चमन लाल गुलाटी छत के रास्ते अंदर दाखिल हुए। इसके बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया।
ताई कमला ने बताया कि दोनों बहनें खिड़की से सामान लेती थी। गली में खेल रहे बच्चों से बिस्किट मंगाकर खा लेती थी। पड़ोस स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर और स्वर्णकार संघ की धर्मशाला के पुजारियों से प्रसाद और भंडारा मंगाकर खा लेती थी। गली में आने वाले सब्जी और फ्रूट विक्रेताओं से खिड़की से ही सामान लेती थी।
दोनों बहनों को तीन घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाहर निकाला गया। दोनों को सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचाया गया है, बड़ी बहन की रीड की हड्डी और पैर में चोट लगी है, जबकि छोटी बहन का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। दोनों का इलाज शुरू करा दिया है। उनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी।
-जाकिर हुसैन, प्रभारी, शहर थाना, पानीपत।