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पानीपत: ट्रेन की चपेट में आकर रेलवे के PWI के इंजीनियर और हेल्पर की मौत, एक ही वक्त दो ट्रैक पर आईं ट्रेन

Thu, 10 Nov 2022 06:47 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, समालखा, पानीपत (हरियाणा)

सार

समालखा में नारायणा फाटक के पास एक ही वक्त पर दो ट्रेनों के आने पर हादसा हुआ। ट्रैक पर रेलवेकर्मी काम कर रहे थे। दो ट्रैक पर एक ही वक्त पर ट्रेन आने से हादसा हो गया।
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पानीपत के समालखा में ट्रेन की चपेट में आने से दो रेलवे कर्मियों की मौत। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा के पानीपत जिले में समालखा कस्बे में नारायणा फाटक के पास गुरुवार को दर्दनाक ट्रेन हादसा हुआ। जिसमें रेलवे में कार्यरत पीडब्ल्यूआई ( परमानेंट वे इंस्पेक्टर ) और हेल्पर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे वक्त रेलवे ट्रैक के रखरखाव के तहत ग्लूड बदलने की तैयारी कर रहे थे। तभी ट्रेन आ गई।

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पीडब्ल्यूआई और हेल्पर को छोड़ बाकी कर्मचारी ट्रैक से हट गए जबकि वे दोनों दूसरे ट्रैक पर आ गए। इसी दौरान इस ट्रैक पर भी ट्रेन आ गई और दोनों की चपेट में आने से मौत हो गई। जीआरपी ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल में रखवाया है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सुबह 11 बजे नारायणा फाटक से थोड़ा आगे रेलवे की टीम ग्लूड बदलने का काम करने के लिए पहुंची थी। सुबह 11ः40 बजे टीम के साथ पीडब्ल्यूआई दिनेश (44) और विक्रम (36) ट्रैक पर ग्लूड बदलने की तैयारी कर रहे थे।
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तभी डाउन ट्रैक पर सचखंड एक्सप्रेस आ गई। उससे बचने के लिए ज्यादातर कर्मी ट्रैक से नीचे उतर आए जबकि दिनेश एवं विक्रम नीचे उतरने की बजाय अप ट्रैक की तरफ हो गए। तभी अप ट्रैक पर आ रही दुर्ग एक्सप्रेस की चपेट में आने से दोनों की मौत हो गई।

दोनों समालखा में ही कार्यरत थे और परिवार सहित क्वार्टरों में रहते थे। हादसे की सूचना पर एईएन सीमा, रेल पथ इंचार्ज पानीपत प्रदीप कुमार सहित अन्य रेलवे कर्मी मौके पर पहुंचे। जीआरपी ने दोनों के शवों को ट्रैक से उठाकर पोस्टमार्टम के लिए पानीपत के सामान्य अस्पताल स्थित शवगृह में भेजा। 

ट्रैक पर ग्लूड बदलने के लिए सफीदों से भी आई थी टीम 
नारायणा फाटक से आगे खंभा नंबर 71-1 के नजदीक ग्लूड बदले जाने थे। इस काम के लिए  सफीदों से भी टीम को बुलाया गया था। सुबह 11 बजे के करीब टीम मौके पर पहुंची। वेल्डिंग टीम के कर्मी सामान को गाड़ियों से उतार रहे थे जबकि पीडब्लूआई दिनेश काम करने की प्लानिंग तैयार कर रहे थे। तभी डाउन ट्रैक पर सचखंड एक्सप्रेस आने पर  दिनेश और विक्रम नीचे आने की बजाय अप ट्रैक की तरफ निकल गए। तभी उन्हें ड्राउन ट्रैक पर आई गाड़ी की आवाज में अप पर आने वाली दुर्ग एक्सप्रेस का पता नहीं चला। 

30 मीटर तक घसीटती ले गई ट्रेन, टुकड़ों में बंटा शरीर, गठरी में बांधकर ले जाना पड़ा  
ट्रेन ने दोनों को 30 मीटर तक घसीटते ले गई। शरीर टुकड़ों में तब्दील हो गए। उन्हें गठरी में बांधकर ले जाना पड़ा। ट्रेन की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि शरीर के टुकड़ने बिखरते चली गई।  जीआरपी चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों रेलवे कर्मियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए पानीपत सामान्य अस्पताल में भिजवा दिया गया है। बिहार के रहने वाले दिनेश के स्वजनों को भी घटना बारे अवगत करा दिया गया है।

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