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Panipat News: ढाई घंटे, 16 बार हंगामे, 217 प्रस्ताव पास

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पानीपत। तीन माह 21 दिन के बाद जिला सचिवालय में करीब ढाई घंटे तक चली नगर निगम सदन की बैठक में पार्षदों ने 16 बार जबरदस्त हंगामा किया। इस दौरान सदन में 12 सार्वजनिक मुद्दों समेत नौ मनोनीत पार्षदों और 196 वार्ड पार्षदों के मुद्दे पास किए गए। जिला सचिवालय में आयोजित सदन की बैठक की अध्यक्षता मेयर अवनीत कौर ने की। यह बैठक करीब पौने तीन बजे शुरू हुई, जो सवा पांच बजे तक चली।
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सबसे ज्यादा बवाल खराब लाइटों की मरम्मत न होने और शहर में लगने वाली नई 16000 लाइटों पर हुआ, जिसमें निगम आयुक्त राहुल नरवाल ने खुद माना कि वे और उनकी टीम पिछले 11 माह से स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के काम में फेल साबित हुई है। इसलिए निगम सदन उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करे। सदन ने इस प्रस्ताव को नकारते हुए कहा कि कोई बात नहीं।
वहीं, शहर विधायक के 16000 लाइटों के बयान पर सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट और सीनियर पार्षद लोकेश नांगरू में तीखी नोकझोंक हो गई। नांगरू ने कहा कि विधायक बोल रहे हैं कि निगम में 16000 लाइटें आई हैं तो वे कहां हैं। सदन में मीडिया को बुलाया जाए और सबके सामने इन लाइटाें को सच बताया जाए। निगम शहर की जनता को गुमराह क्यों कर रहा है।
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इसी बीच पार्षद बलराम मकौल ने भी ताल ठोकते हुए कहा कि विधायक कहां हैं। उन्हें बुलाकर पूछें कि पार्षदाें के वार्डों में दी जाने वाली लाइटें कहां हैं। इस बीच सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने मीडिया को न बुलाने का अनुरोध किया। उन्होंने विधायक का पक्ष लेते हुए कहा कि शायद उनको बताने में कोई भूल हुई हो, लेकिन इस प्रकार मीडिया के सामने सदन का उपहास न बनाएं। इस पर पार्षद लोकेश नांगरू ने सीनियर डिप्टी मेयर को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आप जैसे लोग ही जनता के सामने पार्षदों की सच्चाई आने नहीं देना चाहते। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर ने किसी कारणवश सदन की बैठक को छोड़ दिया।
बार-बार पार्षदों की ओर से विधायक के खिलाफ बढ़ता रोष देखकर विधायक पक्ष में मनोनीत पार्षद सुनील सोनी ने भड़के लोकेश की बात काटने प्रयास किया तो लोकेश ने उन्हें भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आप तो मनोनीत पार्षद हो, जनता तो चुने हुए पार्षदों से जवाब मांगती है। इस पर सुनील सोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या मनोनीत पार्षदों के पास अक्ल नहीं होती। आपको वोट भी दिलवाने का काम मनोनीत पार्षदों ने किया है। जब आयुक्त इसकी जिम्मेदारी ले चुके हैं तो इस मुद्दे को भड़काने का प्रयास न किया जाए।
पार्षद अंजलि शर्मा ने कहा कि मुझे पहले 50 लाइटें देने का वादा किया गया था। फिर ये लाइटें 25 हो गईं, लेकिन इनमें से भी अब तक केवल 13 लाइटें ही दी गई हैं। बाकी लाइटें किस की जेब में गईं हैं, मुझे इसका जवाब चाहिए। मनोनीत पार्षद नरेंद्र सूरा ने कहा कि मुझे भी सौ लाइटें देने का वादा किया गया था, जो आज तक नहीं मिलीं। इस पर आयुक्त ने कहा कि आपकी तो दूर मेरे घर तक की लाइटें अभी तक खराब हैं। फिर आयुक्त बोले कि 16000 में से 2800 लाइटों का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। जब ये लाइटें आएंगी तो सभी को 100-100 लाइटें दी जाएंगी।
मेयर ने सुझाव दिया कि वे पहले नियुक्त किए गए निगम के 42 कर्मचारियों से ही लाइटें ठीक करवाने का काम करेंगे। इसके लिए निगम अपनी ओर से सामान खरीद कर इन कर्मचारियों को देगा। इसके लिए सबसे पहले 25 लाख का टेंडर लगाया जाएगा। वहीं, निगम आयुक्त ने सुझाव दिया कि वे इसके लिए कॉरपस फंड बना सकते हैं, जिसमें कोई सरकारी ग्रांट का पैसा नहीं होगा, कोई ऑडिट नहीं होगी। यह खाता कुछ चुनिंदा लोगों की देखरेख में होगा, जिससे लाइटों को ठीक करवाया जा सकेगा। पार्षदों के पूछने पर बताया गया कि यह फंड एक प्रकार से चंदा से बनाया जाएगा। इसी बीच कुछ पार्षद बोले कि यह मुद्दा पहले वाली सदन की बैठक में पास हो चुका है तो ज्यादातर ने विरोध करते हुए कहा कि नहीं हुआ। आयुक्त बोले कि उन्होंने सदन की कार्यवाही में इसे पढ़ा है तो पार्षद बोले किसी ने ऐसे ही लिख दिया होगा, जैसे कई और मुद्दे लिखे जाते हैं।
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