हरियाणा के जिले कैथल में जिले भर में शुक्रवार की सुबह महज आधे घंटे तक हुई आठ एमएम बरसात के साथ आई तेज हवाओं के झोंके से किसानों के लगभग 27 करोड़ रुपये डूब गए।
जिले की अनाज मंडी में तीन लाख से अधिक धान के कट्टे पड़े हुए हैं। इस समय जिले भर में धान की फसल पक रही है। कुल एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में से करीब 30 प्रतिशत इलाके में उगाई गई धान अभी पकी नहीं है।
इसमें लगभग 10 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा।
जिले में शुक्रवार की सुबह करीब आठ एमएम बरसात दर्ज की गई। आधे घंटे तक चली बरसात के साथ तेज हवाओं ने नमीयुक्त जमीन में खड़ी अधिकतर धान की फसल को जमीन पर बिछा दिया। जिले भर में करीब एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में धान का उत्पादन किया गया है।
इसमें से इस समय करीब 30 प्रतिशत के आस-पास 45000 हेक्टेयर में बासमती ग्रुप का धान पूरी तरह से नहीं पक पाया है। कृषि वैज्ञानिक इनमें से 10 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका जता रहे हैं। वहीं इस तरह से 4500 हेक्टेयर में यदि 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से भी उत्पादन होता तो अनुमानित 3000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों के 27 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।
मंडियों में भीगा धान
अनाज मंडियों में बरसात के कारण किसानों और मिलर्स का धान भीग गया। हालांकि नई अनाज मंडी मार्केट कमेटी सचिव रविंद्र कुमार ने बताया कि बरसात के कारण ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।
कम बरसात होने के चलते बचाव हो गया है। मंडी में जलभराव नहीं हुआ। इस कारण बचाव रह गया है। खेतों में जो फसल गिर गई है, वहां नुकसान हो सकता है। इस समय अनाज मंडी में लगभग तीन लाख से अधिक कट्टे पड़े हुए हैं।
किसानों की चिंताएं बढ़ाई
राजौंद। राजौंद में जोरदार बारिश से किसानों के सभी अरमां बरसात के पानी में बह गए। खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई। किसानों ने बताया कि बारिश से फसल में काफी नुकसान हो गया है।
उन्होंने बताया कि बहुत मेहनत के बाद यह फसल पककर तैयार हुई थी जो अब बेमौसमी बरसात के कारण बर्बाद हो गई। उधर मंडियों में पड़ा धान भीग गया।
किसानों का कहना है कि अगर बरसात नही रुकती उनकी फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती। वहीं नगर में कही भी पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण निचले भागों व गलियों में पानी जमा हो गया। सड़क के बीच भरे पानी से लोगों को गुजरते हुए काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ा।
बिछ गई खेतों में खड़ी फसल
ढांड। बरसात किसानों के लिए आफत बनकर बरसी। जिन किसानों ने बासमती धान की फसलों में पानी की सिंचाई की हुई थी, उन फसलों को नुकसान होने की उम्मीद है, जबकि बिना सिंचाई की फसलों को लाभ होगा।
उधर, बेमौसमी बरसात व तेज हवाओं के चलते किसानों की धान की फसल खेतों में बिछ गई है। इससे काफी नुकसान हो सकता है। उधर बरसात से मौसम भी खुशगवार होने के साथ मौसम में ठंडक पैदा हो गई है।
वहीं बरसात से सड़कों पर कीचड़ फैल गया है और निचली बस्तियों में हलका पानी जमा हो गया है। कृषि विकास अधिकारी डॉ. चंद्र प्रकाश ने बताया कि जिन किसानों ने धान में पानी दिया था, उसमें आंशिक नुकसान की संभावना है, लेकिन जो फसलें नीचे गिरी है, वह आने वाले समय में ठीक हो जाएगी।