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Panipat News: परिवहन व्यवस्था बेपटरी, 49 गांवों के ग्रामीण ऑटो के भरोसे

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बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद
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उमेश त्यागी/विपिन त्यागी
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बापौली। विकास के दावों के बीच उपमंडल का प्रमुख कस्बा बापौली आज भी बुनियादी परिवहन सुविधाओं के लिए तरस रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित बापौली ब्लॉक के 49 गांवों का मुख्य केंद्र है।
तहसील और ब्लॉक स्तर के तमाम प्रशासनिक कार्यों के लिए रोजाना हजारों ग्रामीणों का यहां आना-जाना होता है। इसके बावजूद, इस पूरे क्षेत्र में परिवहन के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। हरियाणा रोडवेज की बसें इस रूट पर न के बराबर चलती हैं, जिससे पूरा इलाका निजी ऑटो और अवैध वाहनों के भरोसे चल रहा है।
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परिवहन संकट के साथ-साथ कस्बे की सबसे बड़ी समस्या किसी निर्धारित बस स्टॉपेज का न होना है। बापौली में नलवा चौक, पुरानी तहसील और जलमाना गोयला अड्डा जैसे तीन प्रमुख पॉइंट हैं, जहां यात्री बसों का इंतजार करते हैं। लेकिन प्रशासन ने कहीं भी कोई आधिकारिक बस स्टॉप या शेल्टर नहीं बनाया गया है। इस वजह से रोडवेज या अन्य बसें चालक की मर्जी के मुताबिक कहीं भी खड़ी हो जाती हैं।
बस के रुकने का कोई तय स्थान न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार तो बस को पकड़ने के लिए यात्रियों को सामान सहित सड़क पर पीछे दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से एक व्यवस्थित बस स्टैंड या कम से कम निर्धारित स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। संवाद


स्टॉपेज न होने से महिलाओं और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है। बसें सड़क पर कहीं भी रोक दी जाती हैं। जब तक यात्री वहां पहुंचता है, बस आगे निकल जाती है। -आर्य सोमपाल गुज्जर
तहसील और ब्लॉक के काम से रोज 49 गांवों के लोग यहां आते हैं। रोडवेज की बसें बहुत कम हैं। जो इक्का-दुक्का बसें आती भी हैं, उनके रुकने का कोई ठिकाना नहीं है। -अनुज रावल

नलवा चौक और पुरानी तहसील के पास हर समय यात्रियों की भीड़ रहती है। बसें चालकों की मनमर्जी से रुकती हैं। कई बार बस के चक्कर में लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। -विनोद मित्तल
बापौली क्षेत्र के साथ 21 से अधिक गांवों की सीधी कनेक्टिविटी है, लेकिन रोडवेज विभाग इस रूट को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में निजी वाहनों और ऑटो से चलना मजबूरी है। -विनोद रावल

बापौली के तीनों प्रमुख अड्डों (नलवा चौक, पुरानी तहसील, जलमाना गोयला अड्डा पर कम से कम साइन बोर्ड और यात्रियों के बैठने की व्यवस्था करनी चाहिए। -शिवचरण
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रोडवेज बसें न मिलने के कारण ऑटो चालक मनमाना किराया वसूलते हैं। देर शाम तो मुख्यालय जाने या वहां से वापस आने के लिए कोई साधन ही नहीं मिलता। समस्या का समाधान जरूरी है। -अशोक कुमार

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

बापौली अड्डे पर खुले आसमां के नीचे इंतजार में खड़े यात्री। संवाद

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