पानीपत। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंकों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मंगलवार को सांकेतिक हड़ताल रखी। जिले की करीब 180 बैंक शाखा के अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल में बैंकों की नौ यूनियन शामिल हुए।
चार दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को पांचवें भी बैंक नहीं खुलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे करीब 900 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मचारियों ने मंगलवार को जीटी रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया।
अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ के हरियाणा के सह सचिव जितेंद्र सरदाना ने कहा कि वेतन समझौते के समय बैंक यूनियन और आईबीए के बीच लिखित में समझौता हुआ था। इसमें तय किया था कि प्रत्येक शनिवार को बैंक बंद रहेंगे। आईबीए ने वित्त मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेज दिया था। यह दो साल बाद भी लंबित है। सरकार की अनदेखी के चलते पूरे देश के सभी राष्ट्रीयकृत बंद रहे। जिले की सभी 180 शाखाएं बंद रही। इससे लगभग 900 करोड़ का कामकाज बाधित हुआ है।
बिना पैसों के लौटना पड़ा : पानीपत। शुक्रवार को सर छोटूराम जयंती का अवकाश था। इसके बाद शनिवार और रविवार का अवकाश रहा। सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवकाश के चलते बैंक बंद थे। बैंक मंगलवार को पांचवें दिन खुलने थे। लोग अपने कार्य कराने के लिए सुबह ही बैंक में पहुंच गए। उनको बैंकों की हड़ताल का पता चला। काबड़ी गांव के रमेश और सौदापुर के कृष्ण ने बताया कि वे मंगलवार को एसबीआई में अपने खाते से पैसे निकलवाने आए थे। उनको बिना पैसों के लौटना पड़ा।
व्यापारी और उद्यमियों को उठानी पड़ी परेशानी : बैंकों की हड़ताल के चलते व्यापारी और उद्यमी अधिक परेशान रहे। उद्यमी बैंकों से जुड़ी पेमेंट का भुगतान नहीं कर सके। इसके अलावा व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। उद्यमी भीम राणा ने बताया कि पहले बैंकों की चार दिन की छुट्टी और पांचवें दिन हड़ताल से आरटीजीएस नहीं की जा सकी।