जिले के कुछ अध्यापक और उद्योगपति ऐसे भी हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। इन्होंने अपनी छत को ही बगीचे में तब्दील कर लिया है। स्वास्थ्य एवं ऑक्सीजन को ध्यान में रखते हुए इन लोगों ने अपनी छतों पर औषधीय पौधे तुलसी, मरूआ, पत्थरचट्ट समेत अन्य कई प्रजातियों के पौधे लगाए हैं, ताकि इनके जरिए खुद को स्वस्थ रखा जा सके। इतना ही नहीं लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए यह अपने घर में ही पौधे तैयार करते हैं और उन्हें वितरित भी करते हैं।
मेरी पीढ़ी मैं ही बचाऊं अभियान की शिक्षक बोधराज करेंगे शुरुआत
शिक्षक व पर्यावरण प्रेमी बोधराज श्योराण इस साल जुलाई से अक्तूबर तक जिले में मेरी पीढ़ी मैं ही बचाऊं अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। बोधराज का कहना है कि वे हर साल जुलाई में ऐसे ही अभियान की शुरुआत करते हैं, जिसमें वे पौधे को लगाने का काम करते हैं। 2020 में बोधराज ने तरू यात्रा अभियान चलाया था, जिसमें ज्यादा से ज्यादा त्रिवेणी लगाने का काम किया गया था। शिक्षक बोधराज ने बताया कि पिछले साल तरू यात्रा के तहत उन्होंने 1100 औषधीय पौधे बांटने का काम किया था।
बचपन से ही बोनसाई पौधे लगाने का था शौक, 150 से ज्यादा किस्में लगाईं
बचपन से ही बोनसाई का शौक रखने वाले उद्योगपति पवन कुमार बिजौरिया ने अपनी पूरी छत पर केवल बोनसाई के पौधे लगा रखे हैं। उन्होंने अपनी छत पर 150 किस्म की 200 से ज्यादा बोनसाई लगाई हैं। उन्होंने पहला बोनसाई पीपल के पौधे का बनाया था। 60 से ज्यादा उम्र होने के बाद भी पवन अपने पौधों का खुद ख्याल रखते हैं। उनका कहना है कि भारत में पौधे लगाने को लेकर कोई नियम नहीं है न ही कोई परंपरा है। जापान में बच्चों को विरासत में जमीन के साथ पौधे भी दिए जाते हैं ताकि वे उस पौधे को विरासत के तौर पर ध्यान से रखें।