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भ्रूण हत्या में तीन डॉक्टरों पर केस

Mon, 16 Sep 2013 11:29 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत के स्वास्थ्य विभाग ने पानीपत सहित समालखा में लिंग जांच और भ्रूण हत्या के घिनौने खेल का भंडाफोड़ किया है। विभाग ने गर्भपात के उपकरण, दवा और रिकार्ड भी जब्त किया है।
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इस मामले में संलिप्त एक एएनएम के क्लीनिक को भी सील कर दिया है। पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की एएनएम, दो महिला डॉक्टरों समेत एक डाक्टर पति के खिलाफ केस दर्ज किया है। एएनएम स्वास्थ्य विभाग के कुटानी सब स्टेशन में कार्यरत है और एक डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की पूर्व एमओ (मेडिकल आफिसर) हैं।

एएनएम और तहसील कैंप की अस्पताल संचालिका को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि समालखा की अस्पताल संचालिका डाक्टर और उसका पति फरार है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार सुबह वधावाराम कॉलोनी के साथ लगती परशुराम कॉलोनी में एएनएम मीना के घर दबिश दी। वह अपने मकान के दो कमरों में क्लीनिक चला रही थी। एक शिकायत पर पहुंची टीम ने यहां से लिंग जांच और बच्चा गर्भपात के उपकरण और दवाएं बरामद कीं।
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विभाग की टीम ने कई घंटे की जांच के बाद क्लीनिक को सील कर दिया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मीना को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद टीम तहसील कैंप, फतेहपुरी रोड स्थित मनीषा मेटरनिटी और जनरल अस्पताल पहुंची। टीम ने यहां से भी लिंग जांच और गर्भपत के उपकरण और दवाएं बरामद कीं। पुलिस ने अस्पताल संचालिका डॉ. मनीषा को गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम समालखा की चांद कॉलोनी स्थित मलिक अस्पताल पहुंची। यहां से भी इसी तरह के उपकरण और दवाएं मिलीं। अस्पताल को डॉ. वंदना मलिक चलाती थीं और पति सहयोग करते थे। जांच के दौरान डॉ. वंदना मलिक और उसके पति फरार हो गए। पुलिस ने एमटीपी एक्ट की धारा तीन, चार और पांच के तहत मामले दर्ज कर लिए हैं।

सात घंटे चली कार्रवाई
टीमों ने सोमवार सुबह 10 से शाम पांच बजे तक अस्पताल और क्लीनिकों की जांच की। इसकी अगुवाई स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जीएल सिंघल और सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ ने की। टीम में पानीपत समेत फरीदाबाद, करनाल और रोहतक के विशेषज्ञ शामिल थे। इसके अलावा टीम में सीनियर ड्रग कंट्रोलर रोहतक रेंज डॉ. मनमोहन तनेजा, जिला ड्रग्स आफिसर गुरचरण सिंह, परमेंद्र मलिक, डॉ. सुधीर बतरा, डॉ. शशि गर्ग सहित कई डॉक्टर थे।

सात साल तक की सजा का प्रावधान
एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी) एक्ट की धारा तीन, चार और पांच के तहत दोनों अस्पतालों की संचालिका, एक डॉक्टर के पति और एएनएम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एएनएम मीना और डॉ. मनीषा को गिरफ्तार किया है। समालखा से डॉ. वंदना मलिक और उसके पति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। वे दोनों फरार हैं। इस एक्ट के तहत आरोपी को दो से सात साल तक सजा का प्रावधान है।

2008 से मिला रिकार्ड
एएनएम मीना 2008 से लिंग जांचने का काम कर रही थी। उसके पास स्वास्थ्य विभाग को 2008 का रिकार्ड मिला है। इसमें आने वाले मरीजों की इंट्री है। मनीषा मेटरनिटी और समालखा के डा. मलिक अस्पताल का रिकार्ड भी इतना ही पुराना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनका रिकार्ड जब्त कर लिया है।

डीसी ने स्वास्थ्य विभाग को बधाई दी
डीसी समीर पाल सरो ने स्वास्थ्य विभाग को इस कार्रवाई पर बधाई दी। उन्होंने कैंप कार्यालय में बताया कि विभाग को इस तरह की कार्रवाई करनी चाहिए। इससे लिंगानुपात सामान्य होगा। इस मौके पर सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़, स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर और स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर डॉ. जीएल सिंघल मौजूद रहे।

अवैध था एएनएम का क्लीनिक : डीसी
अस्पताल और क्लीनिक संचालक को अल्ट्रासाउंड और डिलीवरी की सुविधा देने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग से अनुमति लेनी होती है। जिले में करीबन 52 ऐसे अस्पताल और क्लीनिक हैं, जहां पर डिलीवरी और अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। एएनएम का क्लीनिक अवैध था और समालखा में डॉ. मलिक अस्पताल की संचालिका भी बीएएमएस है। बच्चों की डिलीवरी एमबीबीएस या एमडी ही करा सकते हैं।

सिविल अस्पताल में कराएं डिलीवरी : सीएमओ
सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धरखड़ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग सिविल अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी में बेहतरीन सुविधा दे रहा है। ऐसे लोग सरकारी खर्च पर इलाज कराएं। उन्होंने बताया कि हर माह सिविल अस्पताल की छह सौ समेत जिले में 752 डिलीवरी हो रही हैं। इससे पहले यह आंकड़ा दो सौ से तीन सौ तक ही सीमित रहता था।

चेन सिस्टम के कारण हुआ भंडाफोड़
सपने दिखाकर गर्भ में ही बेटी को मारने की दवा देने की आरोपी एएनएम और तहसील कैंप की अस्पताल संचालिका चेन सिस्टम से काम करती थीं। एएनएम गर्भपात के दौरान बिगड़े मामलों को अस्पताल में रेफर कर देती थीं और डॉ. ऐसे मामलों को अपने सुलझा देती थी। वे जिस चेन सिस्टम से यह काम करती थीं, उसी के कारण पकड़ी गईं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी दोनों में तालमेल का दावा किया है।

टीम परशुराम कालोनी स्थित सरकारी एएनएम मीना के क्लीनिक पर पहुंची। मीना के तीन कमरों के मकान में दो कमरे क्लीनिक के तौर पर इस्तेमाल होते थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम यहां पर रिकार्ड जांच रही थी तो तहसील कैंप, फतेहपुरी चौक स्थित मनीषा मैटरनिटी और जनरल अस्पताल की पर्ची मिली। उन पर डॉ. मनीषा की मुहर और साइन थे और पर्चियां खाली थी। इनको एएनएम मरीज को रेफर करने या बड़ा मामला होने पर रसीद के तौर पर इस्तेमाल करती थी।

नहीं थमे डॉक्टर के आंसू
गर्भ में पल रहे बच्चे को मौत की दवा देकर मां को रुलाने वाली डॉक्टर के पकड़े जाने पर आंसू नहीं थमे। वह स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखकर सकपका गई और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कहती रहीं। टीम ने एक नहीं सुनी। मीडिया टीम अस्पताल पहुंची तो कैमरा देखकर रोती हुई अंदर चली गई। लाल आंखें उनके दर्द को बयान कर रही थीं। यहीं हाल एएनएम मीना और उसके घरवालों का था। उसके पति नारायण दत्त ने तो अपनी पत्नी को बचाने के लिए इसे अपना क्लीनिक बताया और एक कर्मी की मदद से खुद चलाने का दावा किया। नारायण दत्त ने बताया कि वह इसे खुद ही चलाता है।
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