गोहाना रोड पर अभियान चलाकर एंटी हूयमेन ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा रेस्क्यू किए गए बच्चे।
पानीपत। मानव तस्करी विरोधी इकाई ने बालश्रम के खिलाफ अभियान चलाते हुए वीरवार को गोहाना रोड पर अलग-अलग दुकानों पर बालश्रम कर रहे तीन बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। एमडीडी ऑफ इंडिया की शिकायत मिलने पर मानव तस्करी विरोधी इकाई के सदस्य हरकत में आए और उन्होंने गोहाना रोड पर अलग-अलग दुकानों में काम कर रहे तीन बच्चों को रेस्क्यू कराया। रेस्क्यू के बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति में पेश किया जहां इन बच्चों की काउंसलिंग की गई। उसके बाद बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों को बाल देखभाल गृह भेज दिया गया।
कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन के तत्वावधान में काम कर रही एमडीडी ऑफ इंडिया द्वारा न्याय तक पहुंच कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे बचपन बचाओ आंदोलन के तहत पानीपत को बालश्रम से मुक्त करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत वीरवार को मानव तस्करी विरोधी इकाई की कार्रवाई में एसआई पवन कुमार, एएसआई निर्मल सिंह, एएसआई सुनील कुमार, हेड काॅन्स्टेबल मुकेश कुमार और एमडीडी ऑफ इंडिया संस्था से अजय चौहान मौजूद रहे।
एमडीडी ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक संजय कुमार ने कहा कि आज भी देश में बालश्रम एक गंभीर समस्या बनी हुई है। मालिकों द्वारा बच्चों को काम पर रखा जाता है क्योंकि उनका शोषण करना बेहद आसान है। बच्चों को मामूली मजदूरी देकर उनसे 12 से 14 घंटे काम लिया जाता है और उनके साथ मारपीट भी आम बात है। औद्योगिक नगरी पानीपत में बड़ी संख्या प्रवासी श्रमिकों की है जो गरीबी में अपने बच्चों को काम पर लगाते हैं ताकि घर की आमदनी में कुछ इजाफा हो सके।
वहीं आधार कार्ड न होने के चलते भी बहुत से बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाता और बच्चों को स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग भी नहीं मिल पाती। इस मामले में सरकार को चाहिए कि हर परिवार को रोजगार और न्यूनतम मजदूरी मिले ताकि उन्हें विवश होकर बच्चों को मजदूरी पर न लगाना पड़े। साथ ही, ऐसे बच्चों के पुनर्वास का भी पर्याप्त बंदोबस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने दुकानदारों व मालिकों से भी बच्चों को काम पर रखने की बजाय उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।