माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। देश में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) के काले दिनों की यादें आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं। इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को घरों व प्रतिष्ठानों से उठाकर जेल में बंद कर दिया था। विजय कुमार सलूजा और लाला इंद्रसेन गुप्ता पेशावरी समेत 23 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनको पहले करनाल और फिर अंबाला जेल में डाला गया। इनके परिवारों को भी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। कई का तो सप्ताह से 10 दिन बाद जेल में बंद होने का पता चला। संस्मरणों और उनकी डायरी के पन्नों से आपातकाल के दौरान झेली गई प्रताड़ना, संघर्ष और राजनीतिक उथल-पुथल की एक बेहद भावुक और साहसी दास्तान सामने आई है।
पहले ही दिन पानीपत से उठाए थे विजय कुमार सलेजा
मॉडल टाउन के दीपक सलूजा ने बताया कि मेरी आयु उस समय 11 साल थी। मैं अपनी मां चंद्रकांता के साथ सोनीपत अपने मामा के घर गया था। मेरे पिता विजय कुमार सलूजा इंसार बाजार में रहते थे। वे 1970 से 74 तक भारतीय जन संघ के पानीपत अध्यक्ष रहे थे। मेरे पिता को पहले दिन ही उठा लिया था। उनके साथ कई अन्य लोगों को भी पुलिस ने उठा लिया था। उस समय मेरे पिता की आयु करीब 47 वर्ष थी। वे उनको तलाश करते रहे। करीब सात दिन तक उनके परिजनों को पता नहीं चल सका था। उन्हें करनाल जेल में बंद किया गया है। इसके करीब 15 दिनों बाद उन्हें करनाल से अंबाला जेल ट्रांसफर कर दिया गया। अंबाला जेल में उनके साथ पूर्व शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा भी बंद थे। उनके पिता को करीब 19 महीने जेल में काटने पड़ी। इस दौरान उन्होंने पैरोल के लिए आवेदन किया, लेकिन सरकार ने उसे नामंजूर कर दिया। जेल की कठिन परिस्थितियों के कारण उनकी तबीयत इस कदर खराब हो गई कि वजन 80 किलोग्राम से घटकर महज 45 किलोग्राम रह गया था। उनको अंबाला में जीटी रोड से एक ट्रक में पानीपत के लिए बैठा दिया था। वे इसके बाद रात के समय पानीपत अपने घर आए थे। उन्होंने सेवा भारती का काम संभाल लिया था। उनको 1992 में हार्ट अटैक आ गया था। इसके बाद वर्ष 2000 तक उनको हाउस अरेस्ट किया गया। वे लखनऊ में भी अस्थायी जेल में बंद रहे थे।
लाला इंद्र सैन गुप्ता ने कई बार काटी जेल
लाला इंद्र सैन गुप्ता पैशावरी इंप्रूमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन रहे हैं। उनको आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर लिया था। अजय पैशावरी ने बताया कि उनके पिता लाला इंद्र सैन गुप्ता पैशावरी पर 1966 में पंजाब-हरियाणा आंदोलन के समय केस चला था। वे उस समय संघ में नगर कारवाह थे। वे बाद में रिहा हो गए थे। राम मंदिर और हिंदी आंदोलन में कई बार जेल गए। पानीपत जिला बचाओ आंदोलन में भी शामिल रहे। मेरे पिता की इंसार बाजार में दुकान होती थी। संघ की उस समय सत्याग्रह करने की योजना थी। वे शुरुआती दिनों में ही पुलिस पकड़ से दूर हो गए थे। पुलिस ने उनके चाचा वजीरचंद गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। उस समय दुकान व मकान सील करने की तैयारी थी। वे सत्याग्रह करने की तैयारी में थे। इससे पहले ही घर पर पुलिस पहुंच गई। मेरे पिता पुलिस से कुछ समय मांगा। इस समय स्नान करने के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। उनको किला मैदान से गिरफ्तार किया। वे वहां से नारे लगाते हुए आगे। उनके पिता को 1977 में इंप्रूमेंट ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया। वे महेंद्र कुमार रंजन के समय जिला महामंत्री रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरियाणा के प्रभारी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के संगठन मंत्री के समय मेरे पिता जिला महामंत्री थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज के साथ भी काम किया।
इन लोगों को किया था गिरफ्तार
वजीर चंद, लाला इंद्र सैन पेशावरी, मास्टर लाला सुल्तान सिंह, लाला धनपाल, लाला धर्म सिंह, लाला रामेश्वर दयाल दादा पोता, शहीद डाॅ. महिंद्र कुमार रंजन, पूर्व विधायक फतेह चंद विज, विजय कुमार सलूजा को गिरफ्तार किया था। इनके साथ डाॅ. वेद प्रकाश मेजर, बलीराम आनंद, लाला रवि दत्त, जीवन शर्मा, रमेश नांगरु, डाॅ. मनोहर लाल सुनेजा, रघुवीर सिंह सैनी, लेखराज गहलोत, रैमल दास बापौली, गोबिंद राम बापौली, वैद्य ओम प्रकाश बबैल, श्याम नारायण शर्मा, ईश्वर नंदा व जगदीश सोनी को गिरफ्तार किया।
राधेश्याम गोगिया, डाॅ. महेंद्र रंजन और मध्यम में ग्रे रंग के कपड़ों में विजय कुमार सलूजा। स्रोत- फोटो : samvad