नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच पर बार-बार लग रहे भ्रष्टाचार और धांधली के आरोपों पर नकेल कसने के लिए निगम ने ब्रांच में सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं। खास बात यह है कि इन सीसीटीवी कैमरों में सिर्फ तस्वीरें ही कैद नहीं होंगी, बल्कि नहीं ऑडियो यानी आवाज भी रिकार्ड होगी। निगम आयुक्त के साथ जनप्रतिनिधियों के कार्यालय में भी इसकी मॉनिटरिंग रहेगी।
इन कैमरों को लगाने और महज इनकी सूचना से ही निगम कर्मचारी सकते में आ गए हैं। वहीं, कई दलालों ने भी प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में आना-जाना बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी इनका काम सोशल साइट व्हाट्सएप आदि के जरिए जारी है। वहीं, निगम अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का कहना है कि धांधली को लेकर टैक्स ब्रांच की काफी बदनामी हो चुुकी है, लेकिन आज तक न तो यहां के कर्मचारी सुधर पाएं हैं और न ही दलालों पर शिकंजा कसा जा सका है। हर बार सटीक सबूत न होने से ये कार्रवाई से बच जाते हैं। अब बार इनकी वीडियो समेत ऑडियो भी सबूत के तौर पर शामिल कर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मेयर ऑफिस से हाउस मीटिंग तक उठा भ्रष्टाचार का मुद्दा
नगर निगम पानीपत के प्रॉपर्टी टैक्स कार्यालय में सालों से चल रहे इस भ्रष्टाचार का मुद्दा मेयर आफिस से हाउस मीटिंग तक जोरशोर से उठाया जा चुका है। यहां तक कि निगम के तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर गौरव कुमार भी सवा तीन करोड़ रुपये का गोलमाल पकड़ चुके हैं। दो बार खुद मेयर अवनीत कौर यहां पर भ्रष्टाचार को पकड़ चुकी हैं। निगम जनप्रतिनिधि मेयर के साथ मिलकर टैक्स ब्रांच में रेड कर दलालों को भी पकड़ चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है कि आज तक किसी भी दलाल या भ्रष्ट कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
डीसी ने लिया संज्ञान-
प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ते भ्रष्टाचार पर डीसी सुशील सारवान भी संज्ञान ले चुके हैँ। इस मामले में वे नगर निगम के डीएमसी को भी तलब कर चुके हैं। डीएमसी से टैक्स की पूरी प्रक्रिया व दलालों पर कार्रवाई को लेकर विचार विमर्श किया जा चुका है।
व्हाट्सएप पर चलने लगा काम-
अभी भी व्हाट्सएप के जरिए दलाल निगम कर्मचारियों के पूरे संपर्क में हैं। व्हाट्सएप पर फाइलों को पूरा आदान-प्रदान किया जाता है। वहीं, से पूरे नेटवर्क बनाया जाता है। आफिस टाइम के बाहर कर्मचारी दलालों से मिलते हैं और काम के बदले भुगतान की वसूली भी करते हैं।
सीसीटीवी कैमरों से पड़ेगा असर- डीएमसी
टैक्स ब्रांच में सीसीटीवी कैमरे होना अनिवार्य था। इससे बाहर से आने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा सकेगी। इनकी मॉनिटरिंग आयुक्त समेत मेयर कार्यालय तक भी की गई है, जिससे गलत काम करने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।