पानीपत। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी बिना जांच के क्लेम का दावा खारिज नहीं कर सकती। कंपनी ने जिस आधार पर दावा खारिज किया वह पर्याप्त नहीं है। आयोग ने कंपनी को बीमा धारक के इलाज में 1.56 लाख रुपये ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं, साथ ही मानसिक प्रताड़ना के रूप में पांच हजार और मुकदमे में खर्च के रूप में 5500 रुपये देन के आदेश दिए हैं।
पानीपत के अजय शर्मा ने आयोग में याचिका में बताया कि उसने स्टार हेल्थ बीमा कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी, जिसमें वह उसकी पत्नी और बच्चों को कवर किया गया था। पॉलिसी की अवधि 30 जून 2023 से 29 जुलाई 2027 तक थी। वह अगस्त 2023 में पीठ दर्द की बीमारी से पीड़ित हो गए। उनको रेवाड़ी स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहां उनका ऑपरेशन किया और इलाज में 1.56 लाख रुपये खर्च हुए। उन्होंने कंपनी से क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने भुगतान से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी ने अस्पताल के रिकॉर्ड में विरोधाभास, तारीखों और समय में अंतर, डॉक्टरों की जानकारी और अस्पताल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद उन्होंने आयोग में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा और सदस्य वीनित कौशिक ने की। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से बताए गए विरोधाभास बेहद मामूली थे और वे मामले की जड़ तक नहीं जाते।
आयोग ने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता का इलाज बीमा अवधि के दौरान हुआ और इलाज पर खर्च किए गए बिल व दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद हैं। अस्पताल के नाम बदलने या आंतरिक व्यवस्थाओं का बोझ उपभोक्ता पर नहीं डाला जा सकता। जब उपभोक्ता ने प्रीमियम का भुगतान किया है और इलाज वास्तविक है, तो बीमा कंपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज में खर्च हुए 1.56 लाख रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया।