पानीपत। गुरु तेग बहादुर साहिब के 350 वें शहीदी शताब्दी पर्व पर मंगलवार को शहर समेत पूरे जिले में विशेष कार्यक्रम किए गए। शहर के गुरुद्वारा रामदास सिंह, गुरुद्वारा पहली पातशाही और इसराना के साहिब गुरुद्वारा में गुरबाणी का पाठ किया गया। गुरुद्वारा रामदास सिंह सभा में नौ लड़ीवार समागम का नौवां आखिरी कीर्तन दरबार सजाया गया। इसमें शहर की मुख्य संस्थाओं ने हर समागम में नौवें महले के गुरबाणी का गायन कर संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा पहली पातशाही ने जत्थों का स्वागत किया।
गुरुद्वारा रामदास सिंह के प्रधान हरचरण धम्मू ने बताया कि समागम के आखिरी दिन स्कूली बच्चों ने समागम की शुभारंभ किया। जिन्होंने गुरु तेग बहादुर की जीवनी पर प्रस्तुति देकर संगत को निहाल किया। फिर सुखमणि साहिब सेवा सोसायटी से स्त्री सत्संग सभा बच्ची कीरत कौर ने गुरबाणी कर संगत को निहाल किया। अमृतसर के दरबार साहिब से अमनदीप सिंह ने गुरबाणी कीर्तन से संगतों को निहाल किया। समापन समागम पर पालकी साहिब को फूलों से सजाया गया। हजारों की संख्या में संगतों ने हाजरी भर कर गुरु की शहादत को नमन किया। इस अवसर पर मंच संचालन सचिव हरविंदर सिंह लाडी ने किया और बताया कि कैसे हिंद की रक्षा के लिए गुरु ने अपना शीश भेंट किया। इस अवसर पर कैशियर कुलवंत सिंह, सह सचिव विक्रम जीत सिंह, सुनील जग्गा, गुरविंदर सिंह दीप, हरजिंदर सिंह दिलावरी, रजिंदर सिंह उपस्थित रहे।
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गुरुद्वारा पहली पातशाही के प्रबंधकों ने नगर कीर्तनों का किया स्वागत
गुरुद्वारा पहली पातशाही के प्रबंधकों द्वारा गुरु तेग बहादुर के 305 वें शहीदी शताब्दी पर दिल्ली से पहुंचे नगर कीर्तनों का स्वागत किया। महासचिव अगम अपार ने बताया कि गुरुद्वारा में गुरबाणी और शबद कीर्तन किया गया। वहीं दोपहर एक बाद दिल्ली से पहुंचे नगर कीर्तन का स्वागत किया। शाम छह बजे टोल प्लाजा पर नगर कीर्तन का स्वागत किया गया। पूरा दिन गुरुद्वारा में रागी जत्थों ने गुरु तेग बहादुर की जीवनी पर शबद कीर्तन किया और गुरबाणी कर संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा में गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। वहीं इसराना के साहिब गुरुद्वारा में मंगलवार को गुरु तेग बहादुर की शहीदी शताब्दी मनाई गई। इस दौरान गुरु तेग बहादुर की जीवन-गाथा पर गुरबाणी कर संगत को निहाल किया गया। समापन पर गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।