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Panipat News: समागम स्थल ने लिया आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप

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भोड़वाल माजरी ​​स्थित स्थल पर मुख्य गेट को अंतिम रूप देते हुए। स्रोत : मिशन
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समालखा। संत निरंकारी मिशन के भोड़वाल माजरी स्थित समागम स्थल को सेवादारों ने अपने सेवा कार्यों से आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप दे दिया है। मुख्य द्वार से लेकर सत्संग पंडाल तक सभी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस बार जागृति थीम पर होने वाले समागम में सात से आठ लाख अनुयायियों के आने का अनुमान है।
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मिशन का मानना है कि जहां ब्रह्मज्ञान से चेतना जागृत हो, प्रेम से हृदय आलोकित हो और सेवा जीवन का संकल्प बन जाए, वहीं संत समागम आत्मिक जागृति का पावन उत्सव बन जाता है। आध्यात्मिक चेतना को साकार करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता रमित की छत्रछाया में 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्तूबर को आयोजित किया जाएगा। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एकत्र होकर सत्संग, सेवा, प्रेम और भक्ति के इस दिव्य मिलन में सहभागी बनेंगे।
अंतिम चरण में तैयारियां, आध्यात्मिक नगरी में बदला मैदान
श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता के साथ समागम स्थल की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सेवा दल के करीब एक लाख सदस्यों के साथ संगत पिछले एक महीने से लगातार दिन-रात काम कर रही है। संतों की निस्वार्थ सेवा, परिश्रम और समर्पण से सामान्य सा प्रतीत होने वाला मैदान आज एक भव्य आध्यात्मिक नगरी का स्वरूप धारण कर चुका है। विशाल पंडालों में श्रद्धालुओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही, अत्याधुनिक एलईडी स्क्रीन स्थापित की जा रही हैं। इससे परिसर के प्रत्येक कोने में बैठे श्रद्धालु प्रेरणादायक प्रवचनों, भावपूर्ण भजनों व आध्यात्मिक विचारों को सहजता से देख और सुन सकेंगे।
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ब्रह्मज्ञान और विश्वबंधुत्व का अनूठा संगम
यह संत समागम केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान, भक्ति, समर्पण और आत्मिक जागृति का पावन संगम है। यहां श्रद्धालु अपनी अंतर्चेतना को जागृत करने, परमात्मा से अपने संबंध को अनुभव करने तथा विश्वबंधुत्व, सौहार्द और निस्वार्थ सेवा जैसे मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। संत समागम की यही भावना मनुष्य को बाहरी उपलब्धियों से आगे बढ़कर अपने भीतर की समृद्धि को पहचानने का अवसर प्रदान करती है।
मुख्य स्वागत द्वार बना विशेष आकर्षण का केंद्र
समागम की भव्यता में श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी अनुपम कलात्मकता और भव्य स्वरूप के साथ यह द्वार समागम की आध्यात्मिक गरिमा को अभिव्यक्त करता है। यह केवल एक स्वागत संरचना नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, सृजनशीलता और सामूहिक श्रद्धा की साकार अभिव्यक्ति है। श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता के साथ इसका स्वरूप भी निरंतर विस्तार और भव्यता प्राप्त कर रहा है। इसकी दिव्य आभा प्रत्येक आगंतुक का प्रेम, अपनत्व और समभाव के साथ हार्दिक अभिनंदन करती है। संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंद्र सुखीजा ने बताया कि सतगुरु माता की प्रेरणा व आशीर्वाद से समागम की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही हैं। पूरे परिसर को चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। वार्षिक निरंकारी संत समागम प्रेम, भक्ति और आत्मिक जागृति की उस पावन धारा से जुड़ने का अवसर है। यह जीवन को भीतर से प्रकाशित करने की प्रेरणा देता है। संवाद

भोड़वाल माजरी स्थित स्थल पर मुख्य गेट को अंतिम रूप देते हुए। स्रोत : मिशन

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