पानीपत। मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे राम आएंगे...और राम के भजन जप लो रे नैया पार उतर जाएगी...समेत श्रीराम के भजनों पर पूरा पंडाल गूंज उठा और लोग भजनों पर झूम उठे।
मौका रहा समस्त पूर्वांचल समाज पानीपत द्वारा सेक्टर-25 में आयोजित 11 दिवसीय श्रीराम कथा अमृत महोत्सव में रविवार को चौथे दिन का। कथा व्यास आचार्य शिवम शुक्ला महाराज ने कथा के साथ श्रीराम के सुंदर भजनों से भक्तों को मुग्ध कर दिया। एक के बाद एक कई भजनों की सुंदर प्रस्तुति दी।
उन्होंने कहा कि इस संसार में प्रशंसा से मीठा कुछ नहीं है। इसलिए प्रशंसा जरूरत के हिसाब से ही सुननी चाहिए। लोगों की प्रशंसा कई बार झूठी भी होती है। कई बार लोग अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कपट के रास्ते पर चलकर प्रशंसा करते हैं। भगवान श्रीराम ने एक बार हनुमान की प्रशंसा की तो वे सोच विचार में पड़ गए। हनुमान ने सबसे पहले भगवान राम के मुख को देखा। उनको लगा कि यह सच्ची प्रशंसा हो रही है। हनुमान इस पर प्रसन्न हो गए और भगवान श्रीराम के चरणों में पड़ गए। उन्होंने कहा कि भगवान मेरी रक्षा करो। श्रीराम बोले लंका गए थे तो रक्षा नहीं मांगी, अब रक्षा की कैसे जरूरत पड़ गई। हनुमान बोले झूठी प्रशंसा सुनने पर अभिमान होता और आप ताे मेरी सच्ची प्रशंसा कर रहे हैं। निश्चित रूप से मुझमें भी अभिमान आएगा। संसार का नियम है कि अभिमान करने वाला व्यक्ति नीचे गिरता है। वह अगर नीचे गिरेगा तो श्रीराम के चरणों में गिरें। श्रीराम ये बात सुनकर प्रसन्न हो गए। इससे पहले पंडित शिवधर दूबे शास्त्री और पंडित निर्मल शास्त्री ने हवन कराया।