पानीपत। इस वर्ष सौभाग्यवती महिलाएं के लिए करवाचौथ 24 अक्तूबर दिन रविवार को सर्वार्थ सिद्धि और धाता योग में मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी सुबह सूर्योदय से अगली सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। इस बार चतुर्थी को रोहिणी नक्षत्र का भी योग बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र के दिन करवाचौथ का होना भी बहुत शुभ माना गया है।
करवाचौथ का व्रत धाता एवं सर्वार्थ सिद्धि योग, वृषभ राशि (उच्च) का चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। इस पर्व पर सभी सौभाग्यवती महिलाएं एकत्र होकर किसी बुजुर्ग महिला से कहानी सुनती हैं और आपस में करवा बदलती हैं। ऐसा माना जाता है कि करवे को आपस में बदलने से पारिवारिक महिला सदस्य देवरानी-जेठानी, सास-बहू में प्रेम की वृद्धि होती है।
करवाचौथ व्रत पर पूजन का शुभ मुहूर्त
24 अक्तूबर को रविवार होने से सुबह 11:36 से 12:24 बजे तक विशेष मुहूर्तराज अभिजित मुहूर्त होता है। उसके पश्चात स्थिर लग्न (कुंभ लग्न) 14:21 से 15:49 बजे तक रहेगा। यह करवाचौथ की कहानी सुनने एवं पूजन करने के लिए श्रेष्ठ है। रात्रि 8:09 बजे चंद्रमा उदय होंगे। इसी समय में सर्वश्रेष्ठ बात यह है कि उस समय भी वृषभ लग्न रहेगा और 18:50 से 20:46 बजे तक रहेगा। चंद्रमा भी वृषभ लग्न में रहेंगे। करवा चौथ के दिन 24 अक्तूबर को रात 11:35 बजे तक वरियान योग रहेगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ये शुभ योग मंगल कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला होता है। इसके अलावा देर रात 1:02 बजे तक इस दिन रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा। ऐसे शुभ संयोग में सौभाग्यवती महिलाएं चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देंगी और अपने पति के दर्शन कर व्रत खोलेंगी। सौभाग्यशाली महिलाओं के लिए इस वर्ष का यह पर्व अखंड सुहाग के लिए बहुत ही उत्तम रहेगा।
निर्जला व्रत रखेगी सुहागिन स्त्रियां
पंडित राधे-राधे महाराज के अनुसार करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाएं प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखती हैं। इस साल ये व्रत 24 अक्तूबर को मनाया जाएगा। सौभाग्यशाली स्त्रियां सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला रहकर करवाचौथ का व्रत करती हैं और रात को चंद्रमा के दर्शन कर व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं भगवान शिव, गणेश जी और कार्तिकेय के साथ बनी गौरी के चित्र की पूरे विधि विधान के साथ पूजा करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पति की आयु लंबी होती है और महिलाओं का अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस बार इस व्रत पर अद्भुत संयोग बन रहा है, इस दिन एक विशेष वरियान योग है जो अत्यंत मंगलकारी व शुभ फलदायक होता है।