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Panipat News: यमुना में डूब गया था पूरा गांव, किनारे आकर बसे ग्रामीणों ने यूपी के सिनौली पर रखा नाम सनौली

Fri, 12 Jun 2026 02:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
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सनौली गांव का मुख्य द्वार। संवाद - फोटो : अमर उजाला/संवाद
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उमेश त्यागी
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सनौली। यमुना नदी के पास हरियाणा-यूपी सीमा पर बसे सनौली खुर्द गांव का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। गांव पहले यमुना के पास में बसा हुआ था। इसका पुराना नाम कुमासपुर गांव था। यमुना का बहाव बदलने पर पूरा गांव डूब गया था। ग्रामीण पानी से निकलकर वर्तमान स्थान के किनारे पर आकर रहने लगे थे। इसके बाद यमुना पार यूपी के बागपत में त्यागी गोत्र के गांव सिनौली पर गांव का नाम थोड़ा बदलकर सनौली रखा।
सनौली खुर्द गांव जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे गांव के एक हिस्से से होकर जाता है। गांव का इतिहास प्राचीन और मध्यकालीन ऐतिहासिक ताने-बाने से गहराई से जुड़ा हुआ है। सनौली खुर्द और इसके आसपास के इलाके में कई प्राचीन संस्कृतियों और राजवंश के साक्ष्य मिलते हैं। पानीपत के तीनों युद्धों से इस गांव की जमीन का जुड़ाव रहा है। सनौली खुर्द प्रशासनिक रूप से एक खंड है। गांव में कृषि और स्थानीय व्यापार प्रमुख है।
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कोट्स फोटो-
ग्राम पंचायत सरपंच संजय त्यागी ने बताया कि गांव का आपसी भाईचारा अच्छा है। लोग शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। गांव प्राचीन है। वीरता पुरस्कार प्राप्त रक्षाकर्मियों और कारगिल शहीद ऋषिपाल त्यागी शहीद को जन्म दिया है।
कोट्स फोटो
85 वर्ष के सुरता नंबरदार ने बताया कि बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि पहले गांव का नाम कुमासपुर था और यह यमुना के बीच में था। यह बेचिराग गांव था। यमुना के तेज होने पर पूरा गांव डूब गया था। ग्रामीण किनारे पर आकर रहने लगे थे। गांव का बाद में नाम सनौली रखा।
कोट्स फोटो
मुनीराम त्यागी ने बताया कि यूपी के बागपत में सिनौली गांव है। यहां ज्यादातर त्यागी परिवार रहते हैं। सनौली में भी त्यागी परिवार अधिक हैं। उस समय ग्रामीणों का सिनौली में आना-जाना था। ऐसे में गांव का नाम सनौली रखा था।
कोट्स फोटो
जिला पार्षद प्रतिनिधि विपिन पांचाल ने बताया कि गांव यमुना किनारे बसा हुआ है। धार्मिक स्थल बनाए गए हैं। ग्रामीण धार्मिक स्थलों और नियमित रूप से यमुना में पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीण सामाजिक रूप से एकजुट हैं। हर कोई एक दूसरे के के सुख-दुख में भागीदार होते हैं। जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करते हैं।
कोट्स फोटो
मोहनलाल ने बताया कि यमुना नदी के निकट होने के कारण सनौली का इतिहास और भूगोल अक्सर बाढ़ और पानी के कटाव से प्रभावित रहा है। इससे कृषि भूमि और स्थानीय गोशाला जैसे स्थल कई बार प्रभावित होते हैं। गांव में अब फैक्टरी आने लगी हैं। इससे विकास भी बढ़ा है।
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कोट्स फोटो
मोनू ने बताया कि ग्रामीण खेती के साथ अपना व्यापार करते हैं। खेती में धान व गेहूं की परंपरागत फसलों के साथ सब्जी और फलों में लीची और आम की खेती करते हैं। पानीपत-हरिद्वार रोड पर होने के चलते गांव के कुछ लोगों ने अपना व्यापार जोड़ रखा है।

सनौली गांव का मुख्य द्वार। संवाद- फोटो : अमर उजाला/संवाद

सनौली गांव का मुख्य द्वार। संवाद- फोटो : अमर उजाला/संवाद

सनौली गांव का मुख्य द्वार। संवाद- फोटो : अमर उजाला/संवाद

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सनौली गांव का मुख्य द्वार। संवाद- फोटो : अमर उजाला/संवाद

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