अंबाला सिटी। अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) गीतांजलि गोयल की कोर्ट ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के मामले में याचिकाकर्ताओं की अपील को खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि याचिकाकर्ता, मृतक लज्जा राम के दो भाइयों (मोहिंदर सिंह और प्रेम सिंह) के कानूनी वारिस होने का पर्याप्त दस्तावेज सबूत पेश नहीं कर पाए, क्योंकि मोहिंदर सिंह और प्रेम सिंह के जीवित न होने का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं था।
चंद्र शेखर और अन्य (पांच याचिकाकर्ता) बनाम जनरल पब्लिक और अन्य के मामले में यह याचिका भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 372 के तहत उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए दायर की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि उन्होंने इंडियन बैंक में लज्जा राम के नाम पर जमा लगभग 25,000 रुपये की एफडी और एक बैंक लॉकर को ऑपरेट करने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगा था। लज्जा राम का निधन दिसंबर 2020 को हुआ था और उनकी पत्नी जयवंती का निधन उनसे पहले जून 2013 को हो गया था। उनकी कोई संतान नहीं थी। याचिकाकर्ताओं ने खुद को लज्जा राम का द्वितीय श्रेणी का कानूनी वारिस बताया था। संवाद