माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। नगर निगम ने गोहाना रोड पर दोनों नहरों के बीच में कूड़ा डंपिंग स्टेशन बना दिया था। जबकि इसके चारों तरफ किसी प्रकार के सुरक्षा के पैमाने को नहीं अपनाया गया। आसपास के लोग और राहगीर तीन-चार साल परेशान भी रहे। एचएसपीसीबी (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) ने एनजीटी की एक शिकायत पर मौका देखा तो लापरवाही सामने आई। एचएसपीसीबी ने नगर निगम को 11.22 लाख रुपये का जुर्माना की सिफारिश कर केस चेयरमैन को भेजा है। इसमें जुर्माना बढ़ भी सकता है।
नगर निगम के अंतर्गत जेबीएम एन्वायरनमेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, पूजा कंसल्टेंट कंपनी, आईएनडी सैनिटेशन सॉल्यूशन कंपनी काम कर रही है। जेबीएम कंपनी के पास डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम है। बाकी दो कंपनियों के पास शहर में सफाई का काम है। नगर निगम इनकी देखरेख करता है।
जेबीएम ने पिछले दिनों गोहाना रोड पर महराना गांव के रकबे में दोनों नहरों के बीच में कूड़ा डंपिंग स्टेशन बना दिया था। इसकी शिकायत एनजीटी को कर दी थी। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौका मुआयना किया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब इस मामले में चेयरमैन को कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी है। जिसमें नगर निगम पर 11.22 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव बनाया है।
नगर निगम की जिम्मेदारी बताया : एनजीटी की ओर से गठित टीम ने सात अक्तूबर 2024 को मौके का निरीक्षण किया। इसमें जेबीएम पर 11.22 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाने की सिफारिश की। पर्यावरणीय मुआवजे को अंतिम रूप देने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई चार दिसंबर 2024 और 21 जनवरी 2025 को तय की थी।
इकाई के प्रतिनिधि राजेश कुमार पांडे ने बताया कि एमएसडब्ल्यू के भंडारण के लिए निर्दिष्ट स्थान उपलब्ध कराना और उसे अपशिष्ट ऊर्जा संयंत्र तक पहुंचाना नगर निगम पानीपत का काम है। सड़क सफाई और नालों की सफाई का काम करने वाले अन्य ठेकेदार भी सड़क सफाई की धूल, नालों की गाद और मलबा इसी स्थान पर डाल रहे हैं।
इकाई ने यह भी बताया कि स्थल पर पड़ा कचरा साफ कर दिया गया है। इसके लिए नगर निगम पानीपत उत्तरदायी है। इस मामले में पुनः जांच करने और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने संबंधी प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिए।
इसमें नगर निगम पानीपत को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें 23 अप्रैल 2025 को सुनवाई के लिए तय की। जिसमें नगर निगम इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया।